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Green Hydrogen: क्या है ग्रीन हाइड्रोजन, इससे कैसे बदलेगी हमारी-आपकी जिंदगी? जानें इसके बारे में सबकुछ

Fri, 06 Jan 2023 06:46 AM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

PM मोदी ने नवंबर 2020 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन शुरू करने की योजना की बात की थी। ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रधानमंत्री ने देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का एलान किया था
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हरित हाइड्रोजन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को औपचारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इसके लिए बुधवार को 19,744 करोड़ रुपये की राशि भी जारी की गई। इस योजना के जरिए सरकार भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके अवयवों के उत्पादन और निर्यात का केंद्र बनाना चाहती है। ऐसा होने पर आयातित जीवाश्म ईंधन(फॉसिल फ्यूल) पर हमारी निर्भरता कम होगी। साथ ही सरकार का लक्ष्य 2070 तक शून्य उत्सर्जन को हासिल करने का भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 के स्वतंत्रता दिवस पर इस मिशन की घोषणा थी। 
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आखिर ये ग्रीन हाइड्रोजन होती क्या है? सरकार का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन क्या है? इसे लेकर सरकार अब तक क्या-क्या कर चुकी है? पर्यावरण पर इसका क्या असर होगा? हमारी-आपकी जिंदगी में इससे कितना बदलाव आएगा? मिशन के लिए सरकार ने अभी क्या किया है? नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए सरकार ने क्या लक्ष्य रखे हैं? आइये जानते हैं…

ग्रीन हाइड्रोजन होती क्या है?
  हाइड्रोजन प्राकृतिक तौर पर पाया जाने वाला बेहद आम तत्व है, जो अन्य तत्वों के साथ संयोजन में मौजूद है। इसमें प्राकृतिक तौर पर पाए जाने वाले यौगिकों जैसे पानी ( जो दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु के संयोजन से बनता है) से निकाला जाता है। हाइड्रोजन अणु के इस उत्पादन की प्रक्रिया ऊर्जा लेती है। हाइड्रोजन बनाने की यह प्रक्रिया इलक्ट्रोलिसिस कहलाती है। 
पानी के मामले में नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे हवा, पानी या सौर ऊर्जा) का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विखंडन करके जिस हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है उसे ही ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है। ग्रीन हाइड्रोजन में ग्रे हाइड्रोजन की तुलना में काफी कम कार्बन उत्सर्जन होता है। ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग उन क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज करने के लिए किया जा सकता है जो विद्युतीकरण के लिए कठिन हैं, जैसे स्टील और सीमेंट उत्पादन, और इस प्रकार यह जलवायु परिवर्तन को सीमित करने में मदद करता है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर PM मोदी ने नेशनल ग्रीन मिशन की घोषणा की थी - फोटो : ANI
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को लेकर सरकार अब तक क्या-क्या कर चुकी है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2020 में तीसरे आरई-निवेश सम्मेलन को संबोधित करते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन शुरू करने की योजना की बात की थी। ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रधानमंत्री ने देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस (यानी 15 अगस्त, 2021) के अवसर पर राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का एलान किया था। इसके बाद ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए केंद्र सरकार कई अहम कदम उठा चुकी है। 
हरित ऊर्जा स्रोतों से हाइड्रोजन पैदा करने के लिए बजट 2021-22 में हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन शुरू करने का प्रस्ताव किया गया था। 
एनटीपीसी-आरईएल ने लेह में ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन लगाने के लिये और एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (एनवीवीएन) ने फ्यूल सेल बसों की खरीद के लिये टेंडर जारी किये थे। इसके बाद अगस्त 2021 में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किये थे। 
एनटीपीसी-आरईएल लेह में 1.25 मेगावॉट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगा रहा है, जिससे हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन को बिजली मिलेगी। सितंबर 2021 में कोयला मंत्रालय ने कोयला आधारित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए रोड मैप तैयार करने के लिए टास्क फोर्स और विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।
दिसंबर 2021 में एनटीपीसी ने सिम्हाद्री (विशाखापत्तनम के पास) के एनटीपीसी गेस्ट हाउस में इलेक्ट्रोलाइजर का उपयोग करके हाइड्रोजन उत्पादन के साथ ही "एकल ईंधन-सेल आधारित माइक्रो-ग्रिड" परियोजना की शुरुआत की थी। यह भारत की पहली हरित हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा भंडारण परियोजना है। 
राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की ओर एक अहम कदम के रूप में फरवरी 2022 में विद्युत मंत्रालय ने ग्रीन हाइड्रोजन/ ग्रीन अमोनिया नीति अधिसूचित की थी। 
अप्रैल 2022 में एनटीपीसी और गुजरात गैस लिमिटेड के बीच पाइप प्राकृतिक गैस में ग्रीन हाइड्रोजन का मिश्रण करने के लिए समझौता किया था।
अप्रैल 2022 में ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने असम में अपने जोरहाट पंप स्टेशन पर 10 किलोग्राम प्रति दिन की स्थापित क्षमता के साथ भारत के पहले 99.999% शुद्ध ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्लांट की शुरुआत की थी। इस संयंत्र को रिकॉर्ड 3 महीने के समय में चालू किया गया था।
 केंन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2022 में भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) एवं अंतर्राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के बीच रणनीतिक साझेदारी समझौते को मंजूरी दी थी।  
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कॉप 27 में ग्रीन हाइड्रोजन का उल्लेख किया था।
चार जनवरी को केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने 'ग्रीन हाइड्रोजन' का उपयोग करके यूरिया और डीएपी उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। 

पर्यावरण पर इसका क्या असर होगा? 
  ग्रीन हाइड्रोजन एक कार्बन मुक्त, मोबाइल (चलायमान) ऊर्जा स्रोत है जो विद्युतीकरण का पूरक बन सकता है। ग्रीन हाइड्रोजन पानी के अणुओं को इलेक्ट्रोलाइज करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करता है जिससे इस प्रक्रिया में कोई उत्सर्जन नहीं पैदा होती है।

हमारी-आपकी जिंदगी में इससे कितना बदलाव आएगा?
हाइड्रोजन के अनेक उपयोग हैं। ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग उद्योग में किया जा सकता है और घरेलू उपकरणों को बिजली देने के लिए मौजूदा गैस पाइपलाइनों में संग्रहीत किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, शिपिंग के लिए एक शून्य-कार्बन ईंधन, अमोनिया जैसे वाहक में परिवर्तित होने पर यह नवीकरणीय ऊर्जा का परिवहन कर सकता है।

बिजली का उपयोग करने वाली किसी भी चीज को बिजली देने के लिए हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के साथ भी किया जा सकता है, जैसे कि इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण। और बैटरी के विपरीत, हाइड्रोजन ईंधन कोशिकाओं को रिचार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है और जब तक उनके पास हाइड्रोजन ईंधन होता है, तब तक वे नीचे नहीं जाते हैं।

अनुराग ठाकुर - फोटो : एएनआई
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में सरकार ने अभी क्या किया है?
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दे दी है। मिशन के लिए प्रारंभिक परिव्यय 19,744 करोड़ रुपये होगा, जिसमें साइट कार्यक्रम के लिए 17,490 करोड़ रुपये, पायलट परियोजनाओं के लिए 1,466 करोड़ रुपये, अनुसंधान एवं विकास के लिए 400 करोड़ रुपये और अन्य मिशन घटकों के लिए 388 करोड़ रुपये शामिल हैं। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) संबंधित घटकों के कार्यान्वयन के लिए योजना के दिशानिर्देश तैयार करेगा।

जोरहाट, असम में भारत का पहला हरित हाइड्रोजन संयंत्र - फोटो : सोशल मीडिया
भारत में अभी कहां-कहां इस्तेमाल हो रही है ग्रीन हाइड्रोजन? 
देश में पिछले कुछ समय में ऑटो, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और स्टील जैसे क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन का लाभ उठाने का ठोस प्रयास किया जा रहा है। अप्रैल 2022 में, राज्य के स्वामित्व वाली ऑयल इंडिया लिमिटेड ने जोरहाट, असम में भारत का पहला 99.99 प्रतिशत शुद्ध हरित हाइड्रोजन संयंत्र चालू किया।

प्रस्तावित मिशन में, इस्पात क्षेत्र को एक हितधारक बनाया गया है। वहीं, डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) उत्पादन में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करने की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए सरकार से आंशिक वित्त पोषण के साथ पायलट संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है। केरल ने अपने स्वयं के हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था मिशन के लिए एक रणनीतिक रोडमैप, नीति निर्माण और कार्यान्वयन योजनाओं को तैयार करने के लिए एक उच्च-स्तरीय कार्य समूह की स्थापना की है, जो हरित हाइड्रोजन में निवेश को सुविधाजनक बनाने और राज्य को "हरित हाइड्रोजन केंद्र" बनाने के लिए है।

टाटा मोटर लिमिटेड के सहयोग से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अनुसंधान एवं विकास केंद्र ने पहले हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों का परीक्षण किया था। Reliance Industries Ltd, Adani Enterprises, JSW Energy, और Acme Solar जैसी कंपनियों के पास भी ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल करने की योजना है। अडानी ने जून में घोषणा की कि वह "दुनिया का सबसे बड़ा हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र" बनाने के लिए संयुक्त रूप से फ्रांस की कुल ऊर्जा के साथ मिलकर काम करेगा। अमेरिका स्थित ओहमियम इंटरनेशनल ने कर्नाटक में भारत की पहली ग्रीन-हाइड्रोजन फैक्ट्री शुरू की है।
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ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्य - फोटो : सोशल मीडिया
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए सरकार ने क्या लक्ष्य रखे हैं?
सरकार ने इस मिशन से 2030 तक कई लक्ष्य प्राप्त करने की योजना बनाई है, इनमें से अहम यह हैं:

• देश में लगभग 125 जीडब्ल्यू की संबद्ध अक्षय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के साथ प्रति वर्ष कम से कम 5 एमएमटी (मिलियन मीट्रिक टन) की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का विकास,
• आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल निवेश,
• छह लाख से अधिक रोजगार का सृजन,
• कुल मिलाकर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के जीवाश्म ईंधन के आयात में कमी,
• वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 एमएमटी की कमी।
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