न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और मनीष पितले की अध्यक्षता वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने दंपती की दलील को स्वीकारते हुए बच्ची की कस्टडी उसके माता-पिता को सौंप दी। दंपती ने बच्ची को अपने साथ ले जाने के लिए अदालत में दलील दी थी कि बच्ची के पिता एक मल्टीनेशलन कंपनी में वरिष्ठ पद पर हैं, जबकि नानी शिक्षित नहीं और ना ही उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी है, ऐसी स्थिति में बच्ची के शारीरिक, नैतिक और बौद्धिक विकास, अच्छी परवरिश और अच्छे भविष्य के लिए उसे माता-पिता के साथ रहने की जरूरत है।