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West Bengal: कला महोत्सव का हुआ भव्य आयोजन, शास्त्रीय नृत्यों के जरिए कलाकारों ने मोहा मन

Mon, 19 Sep 2022 06:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला एन. अर्जुन, अमर उजाला, कोलकाता

सार

इंटरनेशनल आर्ट्स एंड कल्चर फाउंडेशन के निदेशक श्रीवत्स शांडिल्य ने कहा कि कला महोत्सव का उद्देश्य भारत के विविध कला रूपों को प्रदर्शित करना है। देश के वीरों,शहीदों और देश की महान विभूतियों को इस तरह याद करना अपने आप में गौरव की बात है।  
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कला महोत्सव का हुआ आयोजन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोलकाता में आयोजित कला महोत्सव में राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, कवि कुलगुरु रविंद्रनाथ टैगोर, वीर सावरकर की कविताओं और भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री की कविता दशहरे को नृत्य शैली में प्रस्तुत किया गया। कला महोत्सव का आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव के तहत अंतरराष्ट्रीय कला और संस्कृति फाउंडेशन बंगुलरू और भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के सहयोग से किया गया। इस मौके पर  संस्कार भारती की केंद्रीय समिति सचिव नीलंजना राय ने प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की ऐसी प्रस्तुति बहुत कम ही देखने को मिलती है। जिस ढंग से भारतीय शास्त्रीय नृत्यशैलियों के माध्यम से नृत्यांगणाओं ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रान की प्रस्तुति अलग-अलग ढंग से दी, यह मनमोहक तो है ही अविस्मरणीय भी है।

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कोलकाता में आयोजित कला महोत्सव में भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली की आठ में से सात नृत्य शैली के कलाकारों ने हिस्सा लिया। इंटरनेशनल आर्ट्स एंड कल्चर फाउंडेशन, बैंगलुरू के निदेशक श्रीवत्स शांडिल्य ने कहा कि यह सोचना ही मेरे लिए गर्व का विषय था। कला महोत्सव का उद्देश्य भारत के विविध कला रूपों को प्रदर्शित करना है। देश के वीरों,शहीदों और देश की महान विभूतियों को इस तरह याद करना अपने आप में गौरव की बात है। उन्होंने इसके लिए सांस्कृतिक मंत्रालय का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में इसे केवल कर्नाटक में ही करने का विचार था, लेकिन अब इसका कारवां बढ़ता ही जा रहा है। इस मौके पर उन्होंने सभी कलाकारों का विशेष रूप से धन्यवाद किया।

कला महोत्सव में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित वंदे मातरम पर एक शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखित देशभक्ति कविता, नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित ब्रह्मो भजनों पर प्रमुख शास्त्रीय नर्तक समूहों ने कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, सत्त्रिया और मणिपुरी जैसी शास्त्रीय विधाओं के माध्यम से मनमोहक शास्त्रीय नृत्य द्वारा प्रस्तुति दी।
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इस कार्यक्रम में गुरु संचिता भट्टाचार्य, कलात्मक निदेशक, संचिता डांस फाउंडेशन ग्रुप, गुरु नंदिनी सिन्हा कलात्मक निदेशक, अर्पण केंद्र, बॉबी चक्रवर्ती, कलात्मक निदेशक, रूपकल्पम समूह, ऋत्विका घोष, कलात्मक निदेशक विलासाका समूह, लाली चटर्जी कलात्मक निदेशक शिवम आर्ट, म्यूजिक एंड डांस अकादमी, सुमिता भट्टाचार्जी, कलात्मक निदेशक, छांडे छंडे, हलिसहर समूह और शायोमिता दासगुप्ता, कलात्मक निदेशक प्रज्ञाद्युति समूह के गुरु और कलाकार शामिल रहे।

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