उज्जैन वाले बाबा उमाकांत जी महाराज
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खारघर के सेंट्रल पार्क में दुःख निवारण दशहरा पर्व का भव्य आरंभ उज्जैन के बाबा उमाकांत महाराज के सतसंग और दर्शन के साथ हुआ। इस दौरान देश-विदेश से आए हजारों भक्तों की मौजूदगी रही। इस दौरान अपने संदेश में महाराज ने साधना का महत्व बताते हुए सभी भक्तों से नित्य नियम से ध्यान, भजन और सुमिरन करने का आह्वान किया।
उमाकांत महाराज ने आने वाले समय के प्रति सचेत करते हुए कहा कि खतरे की घंटी जल्द ही बजने वाली है। 1 जनवरी 2026 तक ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होंगी जिसमें साधकों की जरूरत पड़ेगी। साधक जहां खड़े होंगे, वहां विनाशकारी लीला रुकेगी। इसलिए सभी बराबर साधना में लगे रहें और साधना शिविर आयोजित करें।
सतसंग में देश-विदेश से भक्तों का भारी सैलाब उमड़ा। अमेरिका और हांगकांग सहित भारत के कोने-कोने से आए भक्तों के लिए सैकड़ों टेंट और भोजन भंडारे लगाकर व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
बाबा उमाकांत ने सतसंग स्थल के पास लगे विशाल जयगुरुदेव दुःख निवारण ध्वज के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी शारीरिक, मानसिक या पारिवारिक परेशानियों को ध्वज के पास प्रार्थना करके दूर कर सकता है और श्रद्धा भाव के अनुसार लाभ अवश्य प्राप्त होगा।
इस सतसंग में सभी धर्म, जाति और भाषा के लोग आमंत्रित हैं। दो अक्तूबर, विजयदशमी के दिन सुबह 7 बजे बाबा उमाकांत महाराज द्वारा सत्संग और नामदान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।