बीते लोकसभा चुनाव में ज्यादातर राज्यों में विपक्ष के अलग-अलग लडने से भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करने में सफल रही थी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1999 के चुनाव में भाजपा 29 फीसदी से अधिक वोट हासिल करने के बावजूद 182 सीटें जीत पाई थी। जबकि बीते चुनाव में भाजपा महज 31 फीसदी वोट हासिल कर 283 सीटें जीतने में कामयाब रही।
अब यूपी में सपा और बसपा ने हाथ मिलाया है तो कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस का बी टीम बनने के लिए तैयार हो गई है। ऐसे में पवार और ममता की कोशिश दूसरे राज्यों में भी बड़े दलों के नेतृत्व में भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने की है।
141 सांसदों वाले इन दलों के नेता हुए शामिल
कांग्रेस, जदएस, एनसीपी, सपा, बसपा, टीडीपी, टीएमसी, टीआरएस, आप, सीपीएम, रालोद, डीएमके, मक्कल निधि मय्यम और राजद। इन सभी के दलों के लोकसभा में 141 सांसद हैं। बसपा, रालोद, मक्कल निधि मय्यम और डीएमके का लोकसभा में एक भी सांसद नहीं है।