ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह, उर्फ रवींद्र कुमार पाल, की समयपूर्व रिहाई की याचिका ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने खारिज कर दी है। ओडिशा सरकार ने बुधवार (17 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ को राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि दारा सिंह की सजा में छूट (रिमिशन) की मांग वाली याचिका को खारिज करने का आदेश 31 अगस्त को पारित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन की दी अनुमति
राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। पीठ ने याचिकाकर्ता को सजा में छूट की याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने के लिए अपनी रिट याचिका में आवश्यक संशोधन करने की अनुमति दी। अदालत ने आदेश में कहा, 'राज्य ने 31.8.26 के आदेश के जरिए सजा में छूट की याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उचित संशोधन आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी जाती है। तीन सप्ताह बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाए।'
पहले भी दो बार टल चुकी है सुनवाई
गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई दो बार स्थगित कर चुका है। उन मौकों पर अदालत को बताया गया था कि दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई के अनुरोध पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पिछली सुनवाई में पीठ ने चेतावनी दी थी कि यदि अगली तारीख तक राज्य सरकार ने इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया, तो उसके पास राज्य के सचिव को तलब कर देरी के संबंध में स्पष्टीकरण मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
2024 में दायर की थी रिट याचिका
दारा सिंह ने वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर अपनी सजा में छूट और समयपूर्व रिहाई की मांग की थी। उसने अपनी याचिका में कहा था कि वह 25 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। राज्य की मौजूदा सजा में छूट नीति के तहत उन कैदियों के मामलों पर विचार किया जा सकता है, जिनकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदला गया हो और जिन्होंने 25 साल की कैद पूरी कर ली हो।
2003 में सुनाई गई थी मौत की सजा
दारा सिंह को निचली अदालत ने वर्ष 2003 में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2005 में उड़ीसा हाईकोर्ट ने उसकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले को वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। अपनी रिट याचिका में दारा सिंह की ओर से अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि अपराध के समय उसने "युवा उम्र के गुस्से में" यह कृत्य किया था और अब उसे अपने किए पर पछतावा है।
सुधारात्मक सिद्धांत का दिया हवाला
दारा सिंह ने सजा के सुधारात्मक सिद्धांत का हवाला देते हुए समयपूर्व रिहाई की मांग की। उसका कहना था कि उसे जेल से बाहर निकलकर समाज में एक सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में वापस लौटने का अवसर दिया जाना चाहिए। उसने अपनी मांग के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2022 के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई की अनुमति दी गई थी।
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22 जनवरी 1999 को हुई थी जघन्य वारदात
यह घटना 22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में हुई थी। दारा सिंह के नेतृत्व वाली भीड़ ने उस वाहन में आग लगा दी थी, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटे सो रहे थे। इस घटना में ग्राहम स्टेन्स के साथ उनके 10 वर्षीय बेटे फिलिप और 6 वर्षीय बेटे टिमोथी की भी मौत हो गई थी।