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Inflation: पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से भरा खजाना, पांच साल में 36 लाख करोड़ कमाए; क्रूड सस्ता फिर भी राहत नहीं

Thu, 28 Nov 2024 01:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, पेट्रोल और डीजल पर बेतहाशा टैक्स, ड्यूटी और सैस लगाकर मोदी सरकार ने आम जनता से लाखों करोड़ों रुपए लूटे हैं। संसद में पूछे गए प्रश्न के उत्तर के अनुसार, सरकार ने पिछले 5 साल में लोगों की जेबों से 36 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा पैसों की उगाही की है।
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सियासी वार - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाकर सरकार का खजाना भर रहा है। अगर पिछले पांच साल की बात करें तो पेट्रोल-डीजल पर बढ़ाए गए टैक्स के चलते सरकार ने 36 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि एकत्रित कर ली है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि मई 2014 से लेकर अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल में 32 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन मोदी सरकार ने लोगों को कोई राहत नहीं दी। पेट्रोल-डीजल पर लूट जारी है। भाजपा के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने सदन में यह सवाल पूछा था कि गत पांच वर्ष के दौरान पेट्रोल-डीजल पर लगाए गई सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, टैक्स एवं सैस, के चलते कितना राजस्व एकत्रित हुआ है। कांग्रेस सांसद ने यह भी पूछा था कि मार्च 2024 से लेकर अब ग्लोबल क्रूड प्राइस 21 प्रतिशत कम हुआ था, क्या इसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई छूट प्रदान की गई है। 

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कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, पेट्रोल और डीजल पर बेतहाशा टैक्स, ड्यूटी और सैस लगाकर मोदी सरकार ने आम जनता से लाखों करोड़ों रुपए लूटे हैं। संसद में पूछे गए प्रश्न के उत्तर के अनुसार, सरकार ने पिछले 5 साल में लोगों की जेबों से 36 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा पैसों की उगाही की है। मोदी सरकार तर्क ये देगी कि ये पैसा कल्याणकारी योजनाओं और इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर ख़र्च होता है। भाजपा ने लगातार कल्याणकारी योजनाओं का फंड बढ़ाने के बजाय आंकड़ों की हेराफेरी और तथ्यों से छेड़-छाड़ कर उसे कम किया है। कभी पुरानी स्कीम बंद करना, कभी कांग्रेस की योजनाओं का नाम बदल पुरानी योजना को नया बताना और कभी अपनी ही योजनाओं का नाम बार-बार बदलकर वाहवाही लूटने की कोशिश करने में ये सरकार माहिर है। 

खरगे के मुताबिक, इन्फ़्रास्ट्रक्चर का हाल तो हमने पुल गिरने, हवाई अड्डों की छत ढहने, हाईवे पर दरारें आने और नई संसद की छत टपकने से देख ही लिया था। मई 2014 से अब तक अंतर्राष्ट्रीय क्रूड ऑयल में 32 प्रतिशत की गिरावट आई है, पर मोदी सरकार की पेट्रोल-डीज़ल पर लूट जारी है। ऐसा लगता है कि मध्यम वर्ग को लूटने के लिए मोदी सरकार ने कोई काँट्रेक्ट लिया हुआ है। गुरुवार को संसद सदस्य एवं कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा, प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान महंगाई घटाने पर नहीं, बल्कि केवल महंगाई के आंकड़ों को कम दिखाने पर है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआई) के आंकड़ों को इस तरह से पेश करने की कोशिश जा रही है कि महंगाई नियंत्रित दिखे। जमीनी हकीकत यह है कि आम जनता की जेब पर बोझ लगातार बढ़ रहा है। पिछले दस सालों में मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण महंगाई लगातार बढ़ी है।
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महंगाई के चलते आम जनता की आर्थिक स्थिति पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ा है। खाद्य पदार्थों, ईंधन, और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से, दाल, तेल, सब्ज़ी और दूध जैसे आवश्यक खाद्य उत्पादों की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जो परिवारों के बजट पर भारी बोझ डाल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बावजूद पेट्रोल-डीजल महंगा रहा, जिससे परिवहन और अन्य सेवाओं की लागत बढ़ी। आज महंगाई में वृद्धि का एक बड़ा कारण खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें हैं। अब आंकड़ों में महंगाई को कम दिखाने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य पदार्थों का वेटेज कम करने की तैयारी चल रही है। यह महंगाई के वास्तविक प्रभाव को छिपाने का एक प्रयास है, जो बताता है कि इस सरकार की प्राथमिकता महंगाई कम करने की बजाय केवल आंकड़ों को कम करने की है। 

जयराम रमेश ने कहा, यह पहली बार नहीं हो रहा है। मोदी सरकार ने आंकड़ों की बाजीगरी करके देश को गुमराह करने की बार-बार कोशिश की है। पहले, जब भाजपा सरकार जीडीपी वृद्धि दर में यूपीए सरकार से पिछड़ने लगी, तब आधार वर्ष बदलकर विकास दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाने का प्रयास किया गया। ऐसा करके देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति छिपाई गई। रोजगार के वादों में भी यही खेल खेला गया। हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन जब बेरोजगारी बढ़ने लगी, तब इसके आंकड़ों को छिपाने के लिए सर्वेक्षणों और रिपोर्ट्स को रोका गया या संशोधित किया गया। रोजगार के मानदंडों में बदलाव कर स्वरोजगार, मुद्रा लोन लेने और अस्थायी नौकरियों को स्थायी रोज़गार के रूप में गिना गया, ताकि बेरोजगारी के वास्तविक आंकड़े छिपाए जा सकें।

साथ ही, ईपीएफओ डेटा और स्टार्टअप्स को भी रोज़गार वृद्धि का हिस्सा दिखाकर रोज़गार की स्थिति को कृत्रिम रूप से बेहतर प्रस्तुत किया गया। इसी तरह, ग़रीबी में कमी दिखाने के लिए आंकड़ों के मानकों में फेरबदल किया गया। इस वजह से गरीबों को योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई भी हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बावजूद पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। यूपीए सरकार के समय भारत के ईंधन की कीमतों की पड़ोसी देशों से तुलना की जानकारी पीपीएसी की वेबसाइट पर सार्वजनिक होती थी, जिसे मोदी सरकार ने हटा दिया। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल पर टैक्स बढ़ाकर जनता से 36 लाख करोड़ रुपए का राजस्व इकट्ठा किया गया, लेकिन आम लोगों को महंगाई से कोई राहत नहीं दी गई। 

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