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Supreme Court: सरकार ने बताई जम्मू-कश्मीर के बंदियों को बाहर की जेलों में भेजे जाने की वजह; पढ़ें अहम खबरें

Mon, 13 Mar 2023 11:02 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि जम्मू-कश्मीर में जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिये गये 20 से अधिक लोगों को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर की जेलों में स्थानांतरित करने के मामलों में ''वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा'' का मुद्दा शामिल है।  
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
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विस्तार
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सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को जम्मू-कश्मीर के बाहर की जेलों में स्थानांतरित करने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया है। केंद्र  ने शीर्ष अदालत में कहा है कि ऐसा करने में राष्ट्रीय सुरक्षा शामिल है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल चार नवंबर में याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार और अन्य से जवाब मांगा था। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। 

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दरअसल, श्रीनगर निवासी राजा बेगम और तीन अन्य याचियों ने वकील सत्य मित्र के माध्यम से शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में कानून के प्रावधानों के कथित उल्लंघन में बंदियों को केंद्र शासित प्रदेशों के बाहर की जेलों में स्थानांतरित करने को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि स्थानीय कानून के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर नहीं ले जाया जा सकता क्योंकि यह कानून केवल केंद्र शासित प्रदेश पर लागू होता है। ये लोग जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 1978 के प्रावधानों के तहत निवारक हिरासत में हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिए गए 20 से अधिक लोगों को केंद्र शासित प्रदेश की जेलों से उत्तर प्रदेश और हरियाणा की जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनके परिवार के लोग बंदियों से बात तक नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह का संचार स्थापित करने की जरूरत है। 
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इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि जम्मू-कश्मीर में जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिये गये 20 से अधिक लोगों को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर की जेलों में स्थानांतरित करने के मामलों में ''वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा'' का मुद्दा शामिल है।  

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि "हम निर्देश लेंगे लेकिन ये वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे हैं। यह दो लोगों के बीच सिर्फ संवाद जितना आसान नहीं हो सकता है।" फिलहाल, शीर्ष अदालत ने इस मामले को 5 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। 

पुलकित आर्य और अंकिता भंडारी - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की हत्या मामले में SC ने मांगी रिपोर्ट 
वहीं, उत्तराखंड रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट 19 वर्षीय महिला की हत्या के मामले में सोमवार को शीर्ष कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने मामले में की जा रही जांच पर उत्तराखंड सरकार से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। बता दें कि मृतका ऋषिकेश के पास एक बर्खास्त भाजपा नेता के बेटे के स्वामित्व वाले रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी।

जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ मृतक अंकिता भंडारी की हत्या मामले में एक पत्रकार और परिवार के सदस्यों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई है। पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 27 मार्च की तारीख मुकर्रर की।

पीड़िता ऋषिकेश के पास वनंतरा रिसॉर्ट में एक रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। जहां कथित तौर पर रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों द्वारा मार डाला गया था। बाद में सामने आया था कि उसकी हत्या इस वजह से की गई थी क्योकि उसने एक वीआईपी को 'अतिरिक्त सेवाएं' देने के लिए उनके दबाव में आने से इनकार कर दिया था। भंडारी की हत्या के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच विनोद आर्य को भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। मामले में आर्य समेत तीन आरोपी हत्या के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
 
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
भोपाल गैस त्रासदी: केंद्र की उपचारात्मक याचिका पर फैसला कल
सुप्रीम कोर्ट 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीडि़तों के लिए अमेरिका स्थित फर्म यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन से बढ़े मुआवजे के लिए केंद्र की उपचारात्मक याचिका पर कल फैसला सुनाएगा, जो अब डॉव केमिकल्स के स्वामित्व में है।
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