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शरीयत के अनुसार नहीं 'तीन तलाक कानून', SC में दलील पेश करेगी सरकार

Sat, 24 Sep 2016 11:18 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश करने का निर्णय लिया है कि तीन तलाक कानून शरीयत के अनुसार नहीं है। क्योंकि पाकिस्तान, सउदी अरब सहित 20 इस्लामिक देश अपने खुद के वैवाहिक कानून का पालन करते हैं।
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यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख करते हुए केंद्र ने दलील पेश की है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की याचिका जिसमें कहा गया है कि तीन तलाक शरीयत के ही अनुसार पवित्र है, पूरी तरह से गलत है। इस तरह की प्रक्रिया से मौलिक अधिकारों का हनन होता है, जो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में नहीं होना चाहिए।

केंद्र सरकार के सूत्रों का उल्लेख करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, यदि इस्लामिक देश में वैवाहिक कानून का चलन और स्वीकारोक्ति है और यह यह शरीयत के खिलाफ नहीं है तो कैसे यह भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में नहीं लागू हो सकता है, जहां मौलिक अधिकार संविधान के अंतर्गत संरक्षित है।
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इस्लामिक देश कानून के जरिए रेगुलेट करते हैं

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एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस्लामिक देश भी शादी जैसे निजी मसलों को कानून के जरिए रेगुलेट करते हैं। पड़ोस और मिडल ईस्ट के कई इस्लामिक देशों में शादी से जुड़े कानून हैं। इस्लामिक देशों के ऐसे कानून शरीयत के खिलाफ नहीं हैं, तो भारत में यह कैसे शरीयत के खिलाफ हो सकता है? 

उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी सरकार का इस मसले में कोई निजी हित नहीं है। यह मामला मजहब से अलग महिलाओं के लिए न्याय और सम्मान से जुड़ा है। इस मसले पर सरकार का जवाब तैयार करने से जुड़े एक मंत्री ने कहा, 'हमारी राय महिलाओं को न्याय, उनके लिए सम्मान और बिना भेदभाव वाले मानवीय मूल्यों से जुड़े मौलिक अधिकारों से प्रेरित है।'
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