NAVYA: सरकार ने 16 से 18 वर्ष की किशोरियों को गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में रोजगार लायक कौशल देने के लिए ‘नव्या’ पायलट कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। यह कार्यक्रम 24 जून को सोनभद्र से महिला और बाल विकास मंत्रालय व कौशल विकास मंत्रालय की साझेदारी में शुरू होगा। इसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के तहत कमजोर वर्ग की लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना है।
केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि वह 16 से 18 वर्ष की लड़कियों को व्यावसायिक कौशल से लैस करने के लिए के लिए एक नई पायलट पहल 'नव्या' शुरू करने जा रही है, जिसमें खासतौर पर गैर-पारंपरिक नौकरी के क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा। यह पहल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की ओर से संयुक्त रूप से 24 जून को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में शुरू की जाएगी।
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सरकार ने 2047 तक विकसित भारत बनाने लक्ष्य रखा है। इसी के तहत 'नव्या' कार्यक्रम का मकसद है कि ऐसे कमजोर या पिछड़े समुदायों की किशोरियों को ऐसा कौशल दिया जाए, जिससे वे नौकरी करके कार्यबल में बराबर हिस्सा ले सकें। यह पहल उन किशोरियों को फोकस करेगी, जिन्होंने कम से कम कक्षा 10 की परीक्षा पास की हो। इसे 19 राज्यों के 27 जिलों में लागू किया जाएगा, जिनमें आकांक्षी जिले और पूर्वोत्तर के जिले भी शामिल हैं, जो सरकार की समावेशिता पर जोर को दर्शाता है।
कार्यक्रम के शुभारंभ में एमएसडीई के स्वतंत्र प्रभार मंत्री जयंत चौधरी और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर शामिल होंगी। इसमें प्रशिक्षुओं के साथ संवाद होगा और 'प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना' (पीएमकेवीवाई) और पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत प्रमाण पत्र का वितरण भी होगा। सरकारी बयान के अनुसार, 'नव्या' मौजूदा प्रमुख कौशल विकास योजनाओं पर आधारित पहल होगी और किशोरियों के कौशल विकास के लिए मंत्रालयों के बीच तालमेल को औपचारिक बनाएगी।
यह कार्यक्रम सरकार की 'महिला नेतृत्व वाले विकास के प्रति अटल प्रतिबद्धता' को दर्शाता है। यह मानता है कि हर युवा महिला विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के भविष्य की यात्रा में उत्प्रेरक बन सकती है।