भारत बंद के बीच केंद्र सरकार ने एससी/एसटी एक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। चारों तरफ से बने दबाव के बीच केंद्र सरकार ने इस मामले में एक पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी है। इसकी जानकारी केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस जान बुझकर दलितों के बीच सरकार के प्रति नफरत फैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में सभी अधिक दलित सांसद और विधायक हैं।
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की तरफ से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताएगा कि सीधे गिरफ्तारी पर रोक का निर्णय उस कानून को हल्का कर देगा, जिसका उद्देश्य अधिकार विहीन वर्ग को सुरक्षा देना है। मंत्रालय अपनी याचिका में आग्रह करेगा कि ताजा निर्णय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम-1989 के भय को खत्म करेगा, जिससे दलित हिंसा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस कानून के तहत जांच से पहले गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
पिछले सप्ताह केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दलित व आदिवासी सांसद, लोकतांत्रिक जनता पार्टी अध्यक्ष रामविलास पासवान और केंद्रीय सामाजिक न्याय मुंत्री थावरचंद गहलौत के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले थे और विरोध जताया था। गहलौत ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर विरोध जता रहे सभी संगठनों से भी अपना प्रदर्शन वापस लेने की अपील की थी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी केंद्र सरकार से पुनर्विचार याचिका दायर करने का आग्रह किया था।