केंद्र सरकार ने निजी चिकित्सा सेवाओं पर शिकंजा कसने की तैयारी की है। साठ साल पुराने एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) का वजूद खत्म कर एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) का गठन किया जाएगा। निजी चिकित्सा सेवाओं का रेट भी कमीशन के द्वारा ही तय किया जाएगा। इसके पीछे नर्सिंग होम और डॉक्टरों की मनमानी रोकने की तैयारी बताई जा रही है।
एनएमसी को डॉक्टर नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारी चलाएंगे। ये पूरी तरह से नामिनेटेड बॉडी होगी। प्रशासनिक अधिकारियों का चयन केंद्र सरकार करेगी। जबकि एमसीआई में इलेक्ट और नामिनेटेड बॉडी थी। फिलहाल स्टेट आईएमए ने प्रस्तावित बिल पर डॉक्टरों से 31 अगस्त तक आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।
वर्ष 1956 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का गठन किया गया। इसका मकसद डॉक्टरों और मेडिकल कालेजों की मॉनीटरिंग करना था। एमसीआई में रजिस्ट्रेशन के बिना कोई भी डाक्टर प्रेक्टिस नहीं कर सकता है। इसके अलावा मेडिकल कालेज और नए विभाग खोलने की मान्यता भी एमसीआई ही देता है।
साठ साल पुराने एमसीआई की जगह अब एनएमसी को लाने की तैयारी करीब-करीब पूरी हो चुकी है। यही नहीं प्रस्तावित बिल भी तैयार कर लिया गया है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की बागडोर प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में होगी। आयोग में सभी बीस सदस्य नामित किए जाएंगे। जबकि एमसीआई में इलेक्ट और नामित दोनों सदस्य होते थे। नेशनल आईएमए ने हर स्टेट को प्रस्तावित बिल भेजकर इस पर डाक्टरों से प्रस्ताव और सुझाव मांगे हैं।