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नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म करने के लिए सरकार लाएगी संशोधन बिल

Sun, 03 Jul 2016 12:25 AM IST
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, दिल्ली
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संसद - फोटो : PTI
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देशभर में स्कूली शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और गुणवत्ता लाने के लिए केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन के लिए मानसून सत्र के तहत संसद में बिल ला सकती है। देशभर के राज्यों की मांग के चलते ही सरकार नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म करने पर विचार कर रही है।
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इस प्रस्ताव के लिए केंद्र को राज्य सरकारों का समर्थन भी मिल चुका है। खास बात है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को लाने से पहले विभिन्न राज्यों के शिक्षा सचिवों ने इसी सूचना भी भेज दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न राज्यों की ओर से आठवीं कक्षा तक लागू नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म किए जाने के लिए लगातार केंद्र सरकार से मांग की जा रही है।

राज्यों की मांग के चलते ही सरकार ने नो डिटेंशन पॉलिसी के लिए कमेटी गठित की थी, जिसमें 18 राज्यों ने खत्म करने का समर्थन दिया है। राज्य पूर्व की तरह पांचवीं और आठवीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा आयोजित करवाना चाहते हैं। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना था कि नो डिटेंशन पॉलिसी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता नहीं बची है।
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स्कूली शिक्षा का स्तर पंद्रह से बीस वर्ष पीछे चला गया है। राज्यों की मांग के चलते ही अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म करने के लिए मानसून सत्र में शिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन के लिए प्रस्ताव ला रहा है। 
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कांग्रेस शासित राज्यों में भी नो डिटेंशन पालिसी का विरोध 

छात्र - फोटो : अमर उजाला
मंत्रालय अधिकारियों के मुताबिक, सरकार को इस पॉलिसी को खत्म करने के लिए शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन करना होगा और उसके बाद संसद में संशोधन बिल लाना होगा। क्योंकि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत ही नो डिटेंशन पॉलिसी लागू की गयी थी। हालांकि संसद में बिल लाने से पहले संशोधन बिल तैयार करके उसे कैबिनेट से पास भी करना पड़ेगा।

संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद ही नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म की जा सकेगी। सरकार को इसके लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। नो डिटेंशन पॉलिसी बेशक यूपीए सरकार लायी थी लेकिन कांग्रेस शासित राज्य भी इस पॉलिसी को खत्म करना चाहते हैं।

उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री, मंत्री प्रसाद नैथानी का कहना है कि नो डिटेंशन पॉलिसी ने शिक्षा का स्तर गिरा दिया है। हमने केंद्र सरकार से मांग रखी है कि इस पॉलिसी को खत्म करके पूर्व की तरह पांचवीं व आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा आयोजित करवायी जाए। 
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