देशभर में स्कूली शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और गुणवत्ता लाने के लिए केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन के लिए मानसून सत्र के तहत संसद में बिल ला सकती है। देशभर के राज्यों की मांग के चलते ही सरकार नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म करने पर विचार कर रही है।
इस प्रस्ताव के लिए केंद्र को राज्य सरकारों का समर्थन भी मिल चुका है। खास बात है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को लाने से पहले विभिन्न राज्यों के शिक्षा सचिवों ने इसी सूचना भी भेज दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न राज्यों की ओर से आठवीं कक्षा तक लागू नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म किए जाने के लिए लगातार केंद्र सरकार से मांग की जा रही है।
राज्यों की मांग के चलते ही सरकार ने नो डिटेंशन पॉलिसी के लिए कमेटी गठित की थी, जिसमें 18 राज्यों ने खत्म करने का समर्थन दिया है। राज्य पूर्व की तरह पांचवीं और आठवीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा आयोजित करवाना चाहते हैं। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना था कि नो डिटेंशन पॉलिसी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता नहीं बची है।
स्कूली शिक्षा का स्तर पंद्रह से बीस वर्ष पीछे चला गया है। राज्यों की मांग के चलते ही अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय नो डिटेंशन पॉलिसी खत्म करने के लिए मानसून सत्र में शिक्षा का अधिकार कानून में संशोधन के लिए प्रस्ताव ला रहा है।