रक्षा क्षेत्र में व्यय और सीमा तक पहुंचने के लिए नई सड़कों के निर्माण में हुए खर्च के मुद्दे पर राज्यसभा में सोमवार को रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने जवाब दिया है। उन्होंने सोमवार को एक प्रश्न के लिखित जवाब में देश की सीमाओं तक हर मौसम में पहुंच बनाने के लिए पिछले पांच वर्षों में निर्मित नई सड़कों की सीमा-वार लंबाई और सीमा सड़क संगठन द्वारा इन परियोजनाओं पर किए गए वित्तीय व्यय का विवरण दिया है। उन्होंने ये जानकारी राज्यसभा में सरोज पाण्डेय के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा ऑल-वेदर सड़कों का निर्माण भारत-चीन सीमा पर कराया गया है।
भारत-चीन सीमा पर सबसे ज्यादा खर्चा
रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में भारत-चीन सीमा पर 2088.57 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया गया है। दो हजार किलोमीटर की सड़क परियोजनाओं की लागत 15477.06 करोड़ रुपये आई है। इसी तरह भारत-पाकिस्तान सीमा पर 1336.09 किलोमीटर की सड़कें बनवाईं गई हैं, इनकी लागत 4242.38 करोड़ रुपये आई है।
राज्यमंत्री अजय भट्ट ने अपने जवाब में आगे बताया कि इसी तरह भारत-म्यामार सीमा पर 151.15 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया गया है। इस सीमा पर जाने के लिए बनवाई जाने वाली सड़कों के निर्माण में 882.52 करोड़ रुपये खर्चे गए हैं। वहीं, भारत-बांग्लादेश की सीमा पर सबसे कम सड़कों का निर्माण हुआ है। इस सीमा पर 19.25 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ इनकी लागत 165.45 करोड़ रुपये आई है। उन्होंने अपने लिखित जवाब में ये भी बताया कि पिछले पांच वर्षों में देश की सीमाओं पर कुल 3595.06 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया गया है। जिनकी लागत 20767.41 करोड़ रुपये आई है।
गौरतलब है कि मोदी सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा को ज्यादा महत्व दे रही है। इसी को लेकर ही बजट में इस बार रक्षा के व्यय पर अधिक ध्यान दिया गया है ताकि देश की सीमाएं चाक चौकंबद हो सके।
जमकर हुआ हंगामा
गौरतलब है कि देश में बढ़ रही महंगाई, मूल्य वृद्धि के मुद्दे पर विपक्ष लगातार मानसून सत्र में हंगामा कर रहा है। सोमवार को भी सदन के शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने मूल्यवृद्धि को लेकर जमकर हंगामा किया। दरअसल, विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है।
क्या है सीमा सड़क संगठन
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) भारत में एक सड़क निर्माण कार्यकारी बल है यह भारतीय सशस्त्र बलों का हिस्सा है। बीआरओ भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों और मित्र पड़ोसी देशों में सड़क नेटवर्क का विकास और रखरखाव करता है। इसमें 19 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सहित) और पड़ोसी देशों जैसे अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार, ताजिकिस्तान और श्रीलंका में बुनियादी ढांचे का संचालन शामिल है।