केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक नया आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों और विदेशी छात्रों को दाखिला देने वाले विश्वविद्यालयों की भूमिका को स्पष्ट किया जाएगा। यह विधेयक पासपोर्ट और वीजा से जुड़े मुद्दों को भी कवर करेगा।
विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चालू बजट सत्र में संसद में पेश कर सकते हैं। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो यह पुराने कानूनों को समाप्त कर प्रभावी होगा, जिनमें पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920, विदेशी पंजीकरण अधिनियम 1939, विदेशी अधिनियम 1946 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम 2000 शामिल हैं।
आव्रजन और विदेशी विधेयक, 2025 के उद्देश्यों एवं कारणों के विवरण के अनुसार, यह आव्रजन से संबंधित मामलों, अर्थात् आव्रजन अधिकारियों के कार्यों, पासपोर्ट और वीजा की आवश्यकता तथा अन्य मामलों का प्रावधान करता है।
इसमें विदेशियों और उनके पंजीकरण से संबंधित मामलों, किसी विदेशी को प्रवेश देने वाले विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के दायित्व से संबंधित प्रावधानों, विदेशियों को प्रवेश देने वाले अस्पतालों, नर्सिंग होम या किसी अन्य चिकित्सा संस्थान के दायित्व से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट किया जाएगा।
इस विधेयक में केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों को हटाने, माफी देने और आदेश जारी करने का अधिकार स्पष्ट किया। वर्तमान में विदेशी नागरिकों और आव्रजन से जुड़े मामले विदेशी अधिनियम, 1946 और आव्रजन (वाहक दायित्व) अधिनियम, 2000 के तहत प्रबंधित किए जा रहे हैं। ये कानून युद्धकाल में बनाए गए थे।
सरकार का मकसद इन पुराने कानूनों को समाप्त करके एक नया और सरल कानून बनाना है, जिससे नियमों का दोहराव और जटिलता को समाप्त किया जा सके।