विदेशों की तरह जल्द ही भारत में भी पिज्जा या अन्य सामानों की आपूर्ति के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को मंजूरी मिलने वाली है।
भारत सरकार के नागरिक विमानन मंत्रालय ने लंबी बहस के बाद बुधवार को ड्रोन संचालन के लिए मसौदा मानदंड जारी कर दिए हैं। इनके संचालन के लिए यूआईडी के साथ रेडियो फ्रिक्वेंसी टैग की भी आवश्यकता होगी।
नागरिक विमानन महानिदेशक (डीजीसीए) द्वारा तैयार अंतिम मसौदा नियम के मुताबिक आम तौर पर ड्रोन के नाम से पहचाने जाने वाले मानवरहित एरियल सिस्टम (यूएएस) को चलाने के लिए एक खास पहचान नंबर (यूआईडी) की जरूरत होगी।
इसमें कहा गया है कि 250 ग्राम से कम भार के नैनो ड्रोन को केवल एक बार मंजूरी देने वाले नियम से बाहर रखा जाएगा हालांकि उसके पास यूआईडी होनी चाहिए।
नागरिक विमानन सचिव आरएन चौबे ने कहा कि नियमों के तय होते ही ड्रोन के व्यावसायिक इस्तेमाल को मंजूरी मिल जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि मसौदा मानदंड आंतरिक रूप से व्यापक परामर्श के बाद तैयार किए गए हैं। सभी संबंधित विभागों से परामर्श के बाद दिसंबर तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
इस मसौदे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी कई प्रतिबंध प्रस्तावित किए गए हैं। इसके लिए ‘नो ड्रोन जोन’ का प्रस्ताव दिया गया है जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा का 50 किमी का दायरा भी शामिल होगा।
वहीं नागरिक विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू ने उम्मीद जताई है कि मसौदा मानदंड से ड्रोन के सही इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
वर्तमान में ड्रोन के इस्तेमाल से लेकर इसके बेचने और खरीदने को लेकर कोई नियम नहीं हैं। डीजीसीए ने नागरिकों द्वारा ड्रोन के इस्तेमाल पर अक्तूबर 2014 में प्रतिबंध लगाया था।