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संसद के विशेष सत्र पर विवाद: खरगे का केंद्र पर बड़ा हमला, कहा- महिला आरक्षण को बिना चर्चा थोप रही मोदी सरकार

Sun, 12 Apr 2026 09:46 AM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसके साथ ही केंद्र सरकार को एक सुझाव भी दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि अगर सरकार सच में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है, तो 29 अप्रैल के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस पूरे मुद्दे पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
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मल्लिकार्जुन खरगे, अध्यक्ष, कांग्रेस - फोटो : ANI
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विस्तार
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र और महिला आरक्षण कानून को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह विशेष सत्र बिना विपक्ष को भरोसे में लिए बुलाया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। खरगे ने अपने पत्र में लिखा कि सरकार महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को जल्दबाजी में लागू करना चाहती है और इसके पीछे राजनीतिक फायदा लेने की मंशा नजर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विपक्ष से सहयोग तो मांग रही है, लेकिन सबसे अहम मुद्दे, डिलिमिटेशन, पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है। ऐसे में बिना पूरी जानकारी के इस कानून पर सार्थक चर्चा करना संभव नहीं है।
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सरकार की मंशा पर सवाल- खरगे
उन्होंने याद दिलाया कि यह कानून सितंबर 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पास हुआ था और उस समय कांग्रेस ने इसकी तुरंत लागू करने की मांग की थी। लेकिन अब करीब 30 महीने बाद सरकार अचानक विशेष सत्र बुला रही है, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। खरगे ने यह भी कहा कि सरकार का यह दावा सही नहीं है कि उसने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर चर्चा की है। उनके मुताबिक, विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि मौजूदा चुनाव खत्म होने के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि डिलिमिटेशन और कानून में होने वाले संवैधानिक बदलावों पर विस्तार से चर्चा हो सके।
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उन्होंने चिंता जताई कि संसद का यह विशेष सत्र ऐसे समय बुलाया गया है जब कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, न कि वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना।

पुराने मुद्दों का खरगे ने दिया हवाला
खरगे ने अपने पत्र में सरकार के पिछले फैसलों, जैसे नोटबंदी, जीएसटी, जनगणना और राज्यों से जुड़े मुद्दों, का हवाला देते हुए कहा कि इन मामलों में सरकार का रिकॉर्ड भरोसा पैदा नहीं करता। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन का असर केंद्र और राज्यों दोनों पर पड़ेगा, इसलिए जरूरी है कि सभी राजनीतिक दलों और राज्यों की राय ली जाए।
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16-18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र
दरअसल, सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने जा रही है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े बिल लाए जा सकते हैं। साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने और उनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की भी तैयारी है। इसी को लेकर अब राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और विपक्ष सरकार पर जल्दबाजी और राजनीति करने का आरोप लगा रहा है।

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