वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बजट-2017 पेश किया है, लेकिन इसके जरिए विमुद्रीकरण को सही साबित नहीं कर पाए हैं। चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख का कहना है कि जेटली यह बताने में असफल रहे कि जिस विमुद्रीकरण के तहत केन्द्र सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंदकर आम जनता को इतनी परेशानी में रखा, उसके बदले में क्या दिया।
देश की अर्थ व्यवस्था, बाजार और आम लोगों को क्या मिला। इसलिए मुझे नहीं लगता कि सरकार बजट पेश करने का कोई राजनीतिक लाभ ले पाएगी। यशवंत देशमुख का कहना है कि जनता ने विमुद्रीकरण के दर्द को बड़े संयम से झेला। सरकार इसे भ्रष्टाचार, कालाधन और आतंकवाद के विरुद्ध बड़ा हथियार बता रही थी। उम्मीद थी कि वित्तमंत्री इस पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
अरुण जेटली विमुद्रीकरण के बाद जनता को उसके बदले में सौगात देंगे। लेकिन सरकार ने आयकर के स्लैब में थोड़ा सा बदलाव भर किया है। सरकार यह बताकर चुप हो गई है कि विमुद्रीकरण का अर्थव्यवस्था पर थोड़े समय के लिए प्रभाव पड़ेगा, लेकिन लंबे समय के लिए इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा कोई बड़ी पहल नहीं हुई।