रकार ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी झूठी, भ्रामक और कृत्रिम तरीके से तैयार की गई सामग्री पर कार्रवाई तेज करने की सलाह सोशल मीडिया कंपनियों को दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को आशंका है कि ऐसी सामग्री सार्वजनिक शांति भंग कर सकती है और हिंसा भड़का सकती है। क्या अब सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सामग्री की निगरानी और सख्त होगी? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
सरकार ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री पर प्राथमिकता से कार्रवाई करने की सलाह दी है। यह कार्रवाई अधिकृत निकायों से मिली शिकायतों के आधार पर करने को कहा गया है। इनमें कानून लागू कराने वाली एजेंसियां भी शामिल हैं। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह जानकारी दी।
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विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सामग्री पर सख्ती क्यों?
बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंचों को इस बारे में सलाह जारी की है। मंत्रालय ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी कुछ सूचनाओं के ऑनलाइन प्रसार पर चिंता जताई है। ये सूचनाएं झूठी, भ्रामक, बदली हुई या संदर्भ से हटकर पेश की गई हो सकती हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को आशंका है कि ऐसी गैरकानूनी सामग्री से सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक शांति भंग हो सकती है। इससे कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। साथ ही, ऐसी सामग्री हिंसा भड़का सकती है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, मंत्रालय ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी गैरकानूनी सामग्री की पहचान करने और अधिकृत सरकारी निकायों से मिली शिकायतों के आधार पर उस पर प्राथमिकता से कार्रवाई करने की सलाह दी है।
कृत्रिम सामग्री पर लेबल लगाना क्यों जरूरी?
सलाह में सोशल मीडिया मंचों से कहा गया है कि वे अपने मंच पर कृत्रिम तरीके से तैयार की गई सामग्री पर लेबल लगाएं। खास तौर पर ऐसी सामग्री पर लेबल लगाने को कहा गया है, जिसे मौजूदा घटनाओं को दिखाने के तौर पर पेश किया जा रहा है।
सूत्र ने कहा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों को कानून लागू कराने वाली एजेंसियों और अन्य अधिकृत सरकारी एजेंसियों के साथ समय पर सहयोग सुनिश्चित करने की सलाह दी है। इसमें कार्रवाई करना, जानकारी देना और सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। यह सब लागू कानूनों के अनुसार और सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत तय समयसीमा के भीतर किया जाना चाहिए।