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राज्यपाल धनखड़ का ममता पर आरोप, कहा- पश्चिम बंगाल ‘पुलिस राज्य’ बनता जा रहा है

Mon, 04 May 2020 03:11 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, कोलकाता
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ - फोटो : ANI
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पश्चिम बंगाल में एक बार फिर राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच खींचतान बढ़ गई है। राज्यपाल धनखड़ ने सोमवार को सीएम ममता को निशाने पर लिया और उन पर राज्य को 'पुलिस राज्य' बनाने का आरोप लगाया। 

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राज्यपाल ने ममता को लिखे पत्र में कहा, 'ममता राज्य को पुलिस राज्य की तरह चला रही हैं संवैधानिक मानदंडों के बारे में उनका गलत रुख तानाशाही शासन को दर्शाता है, जिसके लिए लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।' 


सीएम को लिखे पत्र में राज्यपाल ने कहा, 'दुर्भाग्यवश पश्चिम बंगाल 'पुलिस राज्य' बनता जा रहा है। जहां अगर कोई सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ कुछ भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करता है तो उसके दरवाजे पर पुलिस दस्तक दे देती है।' 
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उन्होंने कहा, 'यह मुख्यमंत्री की वास्तविकता अपनाने और कोरोना वायरस महामारी से पीड़ित लोगों को राहत देने के लिए सामने आकर काम करने का समय है।' 

राज्यपाल ने ममता को लिखा, 'कड़वी सच्चाई यह है कि राज्य में लोग बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि राज्य में कौन सत्ता का एक बेकार और अतिरिक्त-संवैधानिक फव्वारा है। पश्चिम बंगाल के लोगों को पता है कि सरकार और सिंडिकेट कौन चलाता है।' 

उन्होंने कहा, 'ये एबीसीडी कौन है। यह एक खुला रहस्य है। निश्चित रूप से मैं उनमें से एक नहीं हूं, मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि मैं राज्य के मामलों के बारे में यथोचित अपडेट हूं।'

इससे पहले मुख्यमंत्री बनर्जी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर आरोप लगाया था कि वह कोरोना वायरस संकट के दौरान 'सत्ता हड़पने' की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को पिछले हफ्ते राज्यपाल ने दो पत्र भेजे थे, जिसके बाद ममता ने यह तीखी टिप्पणी की। 

ममता ने धनखड़ को 14 पृष्ठों के अपने जवाब में कहा था कि एक राज्यपाल से एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को इस तरह के शब्द और इस तरह की विषय-वस्तु, अभिप्राय और लहजे वाले पत्र भारत के संवैधानिक एवं राजनीतिक इतिहास में पूर्ण रूप से अभूतपूर्व हैं। 

उन्होंने कहा था कि मेरे और मेरे मंत्रियों तथा मेरे अधिकारियों के खिलाफ आपके (राज्यपाल के) शब्द अपमानजनक, असयंमित, भयादोहन करने वाले और निंदनीय बताए जा सकते हैं। 

ममता ने उन पर उपदेश देने और संवैधानिक नियमों का खुद पालन किए बगैर उसका प्रवचन देने तथा उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि राज्यपाल उनकी (मुख्यमंत्री की) नीतियों से सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इसे उनके संज्ञान में लाने के अलावा उनके पास और कोई शक्ति नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि संकट की इस घड़ी में सत्ता हड़पने की अपनी कोशिशों तेज करने से बाज आने की मैं आपसे विनती करती हूं...आपको सोशल मीडिया पर अपने लगातार ट्वीट में आधिकारिक पत्र/लोगो इस्तेमाल करने से दूर रहना चाहिए। 

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