बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने संसद में पारित वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करते हुए कहा कि गैर-मुस्लिमों का भी वक्फ की संपत्तियों में बराबर का हक है। उन्होंने शनिवार को पटना में कहा कि वक्फ की संपत्तियां अल्लाह की मानी जाती हैं। इसका इस्तेमाल गरीबों, जरूरतमंदों और जनहित के लिए होना चाहिए।
अपने दावे को लेकर उन्होंने कुरान का हवाला देते हुए कहा कि इसमें दो तरह के जरूरतमंदों फकीर (मुस्लिम) और मिस्कीन (गैर-मुस्लिम) का जिक्र है। इसका अर्थ है कि वक्फ से लाभान्वित होने का अधिकार हर जरूरतमंद को है। उन्होंने पटना में वक्फ की तमाम संपत्तियों के बावजूद उस पर कोई अस्पताल या अनाथालय न होने को लेकर भी सवाल उठाया। बिल को लेकर जारी विरोध पर उन्होंने यह भी कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है। हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है।
ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने भी किया समर्थन
उधर, लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने वक्फ बिल का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकारों और धार्मिक नेताओं को वह कदम उठाना चाहिए था जो अब सरकार ने उठाया है। उन्होंने सरकार से वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाने और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने का आग्रह किया। इसी बीच, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा है कि संशोधन विधेयक का विरोध करने वाले गरीब मुसलमान नहीं, बल्कि राजनीतिक मुसलमान हैं।
आप विधायक अमानतुल्लाह खान और एनजीओ ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख
आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ (संशोधन) विधेयक की सांविधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26, 29, 30 और 300-ए के तहत निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और मुसलमानों की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वायत्तता कम करता है। एक गैरसरकारी संगठन(एनजीओ) एपीसीआर ने भी शीर्ष कोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की है।