केंद्र सरकार महिलाओं कर्मचारियों के लिए 26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव में से सात हफ्ते का वेतन नियोक्ताओं को देगा। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह एलान किया। हालांकि यह नियम उन कर्मचारियों पर लागू होगा जिनका वेतन प्रतिमाह 15000 रुपये से अधिक है।
सरकार ने मैटरनिटी लीव की अवधि 12 से बढ़ाकर 26 हफ्ते की दी है
सरकार ने यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया है जिसमें कहा गया है कि मैटरनिटी लीव की अवधि 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते किए जाने के बाद से कंपनियां प्रेग्नेंट महिलाओं को भर्ती करने से बच रही हैं और कई ने महिला कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। मंत्रालय के सचिव राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि नियोक्ताओं को भुगतान के लिए लेबर वेलफेयर सेस फंड का इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया।
इस मद के तहत कामगारों की भलाई के लिए राज्य सरकारों को पैसा दिया जाता है। मार्च 2017 तक इस फंड में 32632 करोड़ रुपये थे। इसमें से मात्र 7500 करोड़ रुपये का ही इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने कहा कि सात हफ्ते का वेतन नियोक्ताओं को वापस किए जाने से महिला कर्मचारियों को फिर से काम पर लौटने पर समस्या का सामना नहीं करना होगा। श्रम मंत्रालय भी इस प्रस्ताव से सहमत है। जल्द ही इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।