केंद्र सरकार ने लोकपाल कानून लाने में देरी के आरोपों को खारिज किया है। कार्मिक मामलों के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए संकेत दिए कि संसद के मानसून सत्र में सरकार यह बिल पेश कर सकती है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि लोकपाल कानून को संसद की मंजूरी के लिए विपक्ष का भी सहयोग चाहिए।
भ्रष्टाचार के मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों की जवाबदेही तय करने वाले लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक संसद में पेश किए गए थे। मगर विपक्षी सदस्यों की मांग पर इसे संसदीय समिति के पास विचार के लिए भेजा गया था।
विधेयक पर विचार के लिए सरकार ने मंत्रियों का समूह भी गठित कर दिया था। मंत्रियों का समूह बने छह महीने से ज्यादा समय बीत चुका है पर अब तक इस मामले में प्रगति न होने पर मोदी सरकार पर इसे जानबूझकर लटकाने का आरोप लग रहा है।
मंगलवार को जितेंद्र सिंह ने सरकार के तीन साल के कामकाज का ब्योरा देते हुए कहा कि पिछली सरकार ने इस कानून को जल्दबाजी में बनाया था और पास कराया था। अब सरकार इस कानून में समय के अनुसार संशोधन करना चाहती है।
सरकार जल्द इसे संसद में पेश करेगी। उधर कोयला घोटाले में कोर्ट द्वारा सचिव स्तरीय अधिकारी को सजा सुनाने के मामले में जितेंद्र सिंह ने कहा कि हम अफसरों के बचाव के लिए भी कई कानूनी कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ये मामला कोर्ट में है और सीबीआई इसमें अपना काम कर रही है।