पाक के प्रथम प्रधानमंत्री और जिले के जमीदार लियाकत अली के नाम चल रही संपत्ति अब शत्रु संपत्ति मानी जाएगी। शहर में सैकड़ों मकान ऐसे हैं, जो नगर पालिका के रिकार्ड में लियाकत अली खां और उसके परिवार के सदस्यों के नाम हैं। भारत सरकार के नए कानून के अंतर्गत दो मार्च 1947 में घोषित शत्रु संपत्ति पर अब सरकार का कब्जा होगा।
लुहारी खुर्द गांव के शाहिद अली ने संसदीय समिति को भेजे अपने सुझाव में बताया कि पाक के पूर्व प्रधानमंत्री लियाकत अली खान का जनपद की अधिकतम संपत्तियों पर कब्जा था। लियाकत के पिता तीन भाई थे, अजमत अली खां, रुस्तम अली खां और उमरदराज अली खां। अजमत अली खां ने अपनी संपत्ति 25 अक्तूबर 1908 को वक्फ के नाम कर दी थी।
अजमत अली खां के दो भाइयों रुस्तम अली खां और उमर दराज अली खां 2/3 संपत्ति के मालिक थे। लियाकत अली खां के पाकिस्तान जाने के बाद भारत सरकार ने उनकी संपत्ति का कुछ भाग ही अपनी अभिरक्षा में लिया, जिसमें उनका निवास स्थान कहकशा को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया। उनके अन्य निवास कब्जे में नहीं लिए गए।
नगर पालिका के रिकार्ड में अभी भी लियाकत अली खां और उमरदराज का नाम चल रहा है। अवैध कब्जाधारियों ने कूटरचित अभिलेखों के आधार पर कब्जा किया हुआ है। ग्राम खतौनियों में जो खुदकास्त बाग आदि संपत्ति थी उन पर भी अवैध कब्जे हैं। इनको भी शत्रु संपत्ति घोषित किया जाए।
पत्र में लिखा गया है कि अजमत अली खां की संपत्ति का सर्वे कराकर अन्य दो हिस्सों की संपत्ति पर सरकार अपना कब्जा करे। जिन भूमाफियाओं ने इनकी संपत्ति बेची है, उन पर भी कार्रवाई हो। शाहिद ने मांग की है कि जनपद और मंडल स्तर पर ट्रिब्यूनल का गठन कर शत्रु संपत्ति के विवादों को समाप्त किया जाए। शाहिद अली ने बताया कि भारत सरकार के नए कानून के अनुसार समस्त शत्रु संपत्ति पर सरकारी कब्जा होगा।