केंद्र सरकार पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम प्रयास में उपस्थित नहीं होने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका देने के पक्ष में नहीं है। कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग की ओर से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी गई।
जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा, उन्हें बृहस्पतिवार रात को यह निर्देश प्राप्त हुआ है कि केंद्र सरकार सिविल सेवा सेवा परीक्षा में छात्रों को अतिरिक्त अवसर देने पर असहमत है।
इस पर पीठ ने राजू को सोमवार तक हलफनामा दायर करने को कहा है। पीठ ने हलफनामे की प्रतिलिपि पक्षकारों को देने के लिए भी कहा है। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
इससे पहले पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि कोरोना महामारी से प्रभावित सिविल सेवा अभ्यर्थियों एक अतिरिक्त मौका देने के मसले पर सरकार व संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि कोरोना महामारी के कारण कई छात्र परीक्षा में बैठ नहीं सके और कई छात्रों को बिना तैयारी के परीक्षा देनी पड़ी। ऐसे में छात्रों को एक और मौका मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए सरकार को विचार करने के लिए कहा था। साथ ही कोर्ट ने सरकार को उम्र में छूट देने पर भी विचार करने को कहा था।