केंद्र सरकार स्मार्ट शहरों का नए सिरे से सर्वे कराकर पता लगाएगी कि इन शहरों में दिव्यांगों व गरीबों के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। फीडबैक के आधार पर मिशन शहरों में चल रहे प्रोजेक्ट में सुधार किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को बताया कि इस कड़ी में केंद्रीय आवास व शहरी विकास मंत्रालय ने पहली बार दिव्यांगों के साथ एक बैठक की। अगले दस दिनों में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर की ओर से एक मसौदा तैयार किया जाएगा।
पुरी ने बताया कि स्मार्ट शहरों को दिव्यांग फ्रेंडली बनाना उनकी प्राथमिकता है। हालांकि, दिव्यांगों की सहूलियत और सेवाओं के लिए बने कानून में पहले से सभी प्रावधान हैं लेकिन वह खुद दिव्यांग व्यक्तियों से उनकी जरूरतें समझना चाहते हैं ताकि सरकार उन्हें पूरा कर सके। उन्होंने बताया कि मंगलवार को हुई पहली बैठक में कई तरह के सुझाव आए हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर इस पर एक मसौदा तैयार करेगा। इसके बाद छह सप्ताह के भीतर एक बार फिर बैठक होगी। इसमें इंस्टीट्यूट के प्रस्तावों को बेहतर किया जाएगा। कोशिश रहेगी कि डिजिटल तकनीक के जरिये दिव्यांगों के लिए विभिन्न बस शेल्टर, एटीएम, रेड लाइट जंक्शन व नगर निगम के एप आदि का इंतजाम हो।
एक बार मसौदा फाइनल होने के बाद उसे सभी 100 स्मार्ट शहरों के मिशन डायरेक्टर को भेजा जाएगा। इस आधार पर जरूरी सुधार किए जाएंगे। आगे इसी तरह की बैठकें दूसरे हितधारकों के साथ भी होंगी।