जावड़ेकर ने कहा कि 47 हजार करोड़ रुपयों से ज्यादा का फंड प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए ) के तहत देश के विभिन्न हिस्सों को हरा-भरा बनाने के लिए खर्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा बैठक में लैंटाना खरपतवार के उन्मूलन के अलावा वनों में जल, जल संरक्षण चारा संवर्धन और जंगलों में नमी प्रबंधन के लिए सीएएमपीए फंड के उपयोग जैसे मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, इसके अलावा वन क्षेत्र का प्रभावी ढंग से उपयोग करने जल संरक्षण और वहां रहने वाले जीवों के लिए जंगल में भी प्रचुर मात्रा में भोजन की व्यवस्था को सुनिश्चित करने और नमी प्रबंधन के साथ ग्रीन कवर को बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई ताकि मनुष्य और पशुओं के मध्य संघर्ष को कम किया जा सके और प्रकृति की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।
उन्होंने कहा चार महीने में यह दूसरा मौका है जब वह राज्यों के साथ इस मसले पर चिंतन के लिए बैठे हैं। अगस्त में राज्यों को सीएएमपीए फंड सौंपा गया है। अब उसकी समीक्षा और आने वाले पांच महीनों के लिए कार्ययोजना पर राज्यों के साथ पर्यावरण मंत्रालय ने बैठक की है।
प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, अर्थव्यवस्था की सुस्ती से घबराने की अवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा सरकार ने अर्थव्यवस्था सुधार को लेकर जो कदम उठाए हैं उसका असर दिख रहा है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों में गिरावट की वजह वैश्विक कारणों से है। उन्होंने कहा आर्थिक सुस्ती जो दुनिया में है उसका थोड़ा असर भारत में भी दिख रहा है। लेकिन यहां लोगों के हाथों में पैसे का प्रवाह बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है। सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। इसमें बैंकों का विलय, बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपये दिए हैं। ढाई लाख करोड़ का कर्ज उद्योगों को देने के लिए विशेष कार्यक्रम घोषित किया है। सरकारी उपक्रमों में विनिवेश का फैसला लिया गया है । भारत दुनिया में सबसे कम कारपोरेट कर वाला देश बन गया है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।