आईएलएंडएफएस समूह की कुछ कंपनियों को बैंक द्वारा दिए गए ऋण के लिए जरूरी प्रावधानीकरण जरूरतों में रियायत देने के लिए सरकार जल्द ही आरबीआई से एक विशेष व्यवस्था की मांग करेगी। एक अधिकारिक सूत्र ने मंगलवार को कहा कि सरकार द्वारा यह कदम संकट से जूझ रही कंपनी के अपनी संपत्ति की बिक्री कर धन जुटाने के प्रयासों के बीच उठाया गया है। 91,000 करोड़ के कर्ज में डूबे समूह की कुछ कंपनियां ऋण को वापस करने में विफल रही है। आईएलएंडएफएस ने पिछले साल प्रणाली में तरलता से जुड़ी चिंता जाहिर की है, जिसके बाद कॉरपोरेट मामले के मंत्रालय ने उसके बोर्ड को निलंबित कर दिया था।
सूत्रों के अनुसार, आईएलएंडएफएस द्वारा अपनी संपत्तियों को बेच धन जुटाने के प्रयासों पर काम जारी है और उम्मीद है कि समूह अगले चार से पांच महीनों में अपना ऋण चुकता कर दे। इस मसले पर सूत्र ने कहा कि मंत्रालय जल्द ही आरबीआई से समूह की कंपनियों के ऋण से संबधित प्रावधानीकरण जरूरतों के लिए एक विशेष व्यवस्था की मांग करेगा।
बैंकों के एनपीए से संबंधी मामलों के लिए आरबीआई के नियम सख्त हैं, और सरकार द्वारा मांगी गई इस रियायत से सरकार को आईएलएंडएफएस के मुद्दों को हल करने के लिए अधिक समय मिल जाएगा। सूत्र के अनुसार सरकार से आईएलएंडएफएस समूह की कुछ ऐसी कंपनियों की पहचान की है, जिनके एस्क्रो खातों में पर्याप्त धन मौजूद है। लेकिन वह कर्ज की किस्तों को चुकाने में असमर्थ है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार जल्द ही मौजूदा स्थिति का जायजा लेगी। विशेष व्यवस्था के लिए सरकार समूह की कुछ कंपनियों के एस्क्रो खातों में उपलब्ध धन की भी जांच करेगी।