कांग्रेस ने सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से निकाले गए टेंडर के हवाले से आरोप लगाया कि सरकार निजिता पर वार कर लोगों के जीवन में ताकझांक और नियंत्रण रखना चाहती है। कांग्रेस प्रवक्ता डा. अभिषेक मनु सिंघवी ने दस्तावेज सार्वजनिक कर बताया कि सरकार ने सोशल मीडिया कम्युनिटी हब के लिए कांट्रेक्टर को 42 करोड़ रुपए में एक साफ्टवेयर बनाकर देने का टेंडर निकाला है। जिसके माध्यम से फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम, गूगल, प्ले स्टोर, फ्लिकर आदि 12 सोशल मीडिया प्लेटफार्म, ब्लॉग आदि के डेटा को सुना और निगरानी रखी जा सकेगी। उनका कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी खुला है।
सिंघवी का कहना है कि सरकार को निजिता पर सुप्रीम के हाल के फैसले की भी परवाह नहीं है। जनता के पैसे से जनता का निरीक्षण करना सरकार का पहला उद्देश्य बन गया है। सरकार की ओर से जिस कमेटी ने टेंडर तैयार किया है उसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं रखा है कि आखिर लोगों की जानकारी और डेटा सुरक्षित कैसे रहेगा। जबकि हाल ही कैंब्रिज एनालिटिका, पीएनबी से जुड़ी जानकारियां लीक हुई है। टेंडर में डेटा संग्रह की बात भी कही गई है। आखिर सरकार को लोगों की निजी जानकारियों के संग्रह की क्या आवश्यकता है।
सिंघवी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है और हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है कि उसकी निजिता में दखल न हो। मानवाधिकार और आईटी एक्ट भी कहता है कि डेटा को लेकर कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। सरकार ने डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के लिए एक श्रीकृष्णा कमेटी का गठन किया है जिसकी रिपोर्ट अभी आनी है ऐसे में उसका इंतजार क्यों नहीं किया जा रहा है। गंभीर और चिंताजनक विषय है सरकार यत्र-तत्र लोगों के घरों में घुसना चाहती है। उन्होंने बताया कि टेंडर के लिए 31 मई तक समय दिया गया था।