नाबालिगों को सरकार आधार कार्ड रद्द करने का विकल्प देने पर विचार कर रही है। सरकार ने लोकसभा में कहा कि आधार बनवा चुके नाबालिगों को सरकार 18 साल की उम्र होने के बाद इसे रद्द करवाने का विकल्प भी देगी। इसके लिए सरकार ने लोकसभा में एक बिल पेश किया है। यह लोगों को बैंक खाता खोलने या मोबाइल सिम के लिए स्वेच्छा से आधार नंबर देने की भी इजाजत देता है।
सरकार द्वारा पेश यह बिल आधार, टेलीकॉम सेक्टर और बैंकिंग रेगुलेशन से जुड़े तीन अलग-अलग कानूनों में संशोधन से जुड़ा है। इसमें आधार के इस्तेमाल के लिए तय नियमों के उल्लंघन पर सख्त सजा का भी प्रावधान है। आधार और अन्य कानून (संशोधन) बिल, 2018 को कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने लोकसभा में पेश किया। इसके तहत स्वेच्छा से आधार नंबर देने वालों की बुनियादी बायोमीट्रिक जानकारी और आधार नंबर स्टोर करना प्रतिबंधित है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि आधार नंबर नहीं देने वालों को बैंक खाता या सिम कार्ड सहित किसी भी सेवा से वंचित नहीं कर सकते हैं।
123 करोड़ लोगों को आधार जारी किए गए
सरकार ने बताया कि देश भर में करीब 123 करोड़ लोगों को अब तक आधार जारी किए जा चुके हैं। गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया,
‘यूआईडीएआई द्वारा 30 नवंबर 2018 तक कुल 122.90 करोड़ आधार जारी किए गए हैं। इनमें से पांच साल से कम आयु वाले बच्चों के 6.71 करोड़ आधार और पांच से 18 साल के आयु वर्ग के 29.02 करोड़ आधार शामिल हैं।’
अहीर ने कहा कि नमूना रजिस्ट्रीकरण प्रणाली से उपलब्ध अद्यतन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 के लिए जन्मदर 20.4 और मृत्युदर 6.4 है।