केंद्र ने राज्यों के बीच नदी जल विवादों को सुलझाने के लिए एक ही स्थायी ट्रिब्यूनल गठित करने के फैसला किया है। इसमें सभी मौजूदा ट्रिब्यूनल समाहित हो जाएंगे। नदी जल विवादों के जल्द निपटारे के मकसद से एक स्थायी ट्रिब्यूनल गठित करने का फैसला किया गया है।
इसके अलावा सरकार ने अंतर-राज्य नदी विवाद कानून, 1956 में संशोधन कर कुछ पीठों के गठन का प्रस्ताव रखा है। इससे जरूरत पड़ने पर नदी जल विवादों पर फैसला किया जाएगा। हालांकि एक बार विवाद खत्म हो जाने पर पीठ का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
इस सप्ताह की शुरुआत में अंतर राज्य नदी विवाद कानून, 1956 में संशोधन को कैबिनेट में मंजूरी दे दी गई। संशोधन को संसद के अगले सत्र में पेश किया जा सकता है। जल संसाधन सचिव शशि शेखर ने कहा कि नदी जल विवादों को निपटाने के लिए अलग-अलग ट्रिब्यूनल के बजाय एक ट्रिूब्यूनल होगा और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जज इसके अध्यक्ष होंगे।
जब जरूरत होगी तब बेंचों का गठन किया जा सकता है। विवाद खत्म होने पर बेंच खत्म कर दिए जाएंगे। इससे पहले शेखर ने कहा था ट्रिब्यूनलों को नदी जल विवादों को निपटाने में बरसों लग जाते हैं। जबकि प्रस्तावित केंद्रीय ट्रिब्यूनल में विवादों के निपटारे के लिए तीन साल का समय निर्धारित होगा।