सरकार ने चेयरमैन व प्रबंध निदेशक के तौर पर हरियाणा कैडर के पूर्व आईएएस अफसर युद्धवीर सिंह मलिक, जबकि सदस्य निदेशकों के तौर पर एके मित्तल (एनबीसीसी के पूर्व सीएमडी), रेणु सूद कर्नाड (चेयरमैन, एचडीएफसी क्रेडिला फाइनेंस सर्विस प्राइवेट लिमिटेड), जीतू वीरवानी (सीएमडी, एंबेसी ग्रुप) और निरंजन हीरानंदानी (एमडी, हीरानंदानी ग्रुप) का नाम सुप्रीम कोर्ट को सौंपा है। साथ ही बोर्ड निदेशकों की तरफ से तैयार रेजोल्यूशन फ्रेमवर्क की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज को नियुक्त करने की मांग की गई है।
सरकार ने की है यह मांग
- कंपनी की संपत्ति बेचने को नियुक्त जस्टिस एसएन धींगड़ा कमेटी को स्थगित किया जाए
- नामित निदेशकों को कंपनी के खिलाफ देशभर में लंबित मुकदमों से अलग रखा जाए
- निदेशकों को फ्लैट खरीदारों से बकाया लेने, अनबिके मकानों को बेचने की छूट दी जाए
जनहित में केंद्र सरकार ने दूसरी बार किसी निजी कंपनी के अधिग्रहण का फैसला किया है। इससे पहले 2009 में सरकार ने सत्यम इंफोटेक का अधिग्रहण किया था, जिसे बाद में महिंद्रा आईटी ने ले लिया था।
एक नजर में
- 250 कंपनियां हैं यूनिटेक ग्रुप की देश-विदेश में
- 29800 फ्लैट खरीदारों ने कंपनी को दिया पैसा
- 14,270 करोड़ रुपये जुटाए गए इन खरीदारों से
- 1805 करोड़ का कर्ज 6 वित्तीय संस्थानों से लिया
- 74 हाउसिंग प्रोजेक्ट कर दिए गए एक साथ चालू
- 5763 करोड़ रुपये का उपयोग ही नहीं किया गया