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क्या जाति-धर्म देख तय हो रहे सरकारों के काम? भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल

Mon, 19 Oct 2020 11:15 PM IST
दीप्ति मिश्रा अमित शर्मा, नई दिल्ली
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भाजपा-कांग्रेस - फोटो : फाइल
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चुनाव के बाद सरकार चाहे जिस दल की आए, उसे हर नागरिक और मतदाता की सरकार माना जाता है। लोकतंत्र का आदर्श रहा है कि चुनी हुई सरकारें हर व्यक्ति के विकास के लिए काम करती रही हैं। लेकिन विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अब सत्ता का चरित्र बदल रहा है और सरकारों के काम लोगों के धर्म-जाति को देखकर प्रभावित हो रहे हैं। कई सरकारों पर इसी तरह का पक्षपात करने के आरोप लग रहे हैं।

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कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया, अब तक के अनुभव से यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं या एक विशेष जाति के लोगों को कुछ भी करने की छूट मिली हुई है। अपराध के कई संगीन मामलों में एक जाति विशेष के लोगों के साथ नरमी बरती गई है, जबकि अगर अपराधी किसी अन्य वर्ग से संबंध रखता है, तो उसके साथ कठोर कार्रवाई की जाती है। यह भेदभाव एक आम इंसान को परेशान करने वाला है। उन्होंने कहा कि एक चुनी हुई सरकार का ऐसा व्यवहार लोगों का लोकतंत्र में भरोसा कमजोर करने वाला होता है। सरकारों को ऐसा काम करने से बचना चाहिए।

राहुल राजपूत को पर्याप्त मदद क्यों नहीं ?
इस तरह के आरोप यूपी सरकार पर ही नहीं, दिल्ली सरकार पर भी लगते हैं। भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा कहते हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पीड़ितों की मदद के नाम पर हैदराबाद से लेकर झारखंड तक पहुंच जाते हैं और लाखों-करोड़ों के मुआवजे की घोषणा कर देते हैं। बग्गा का आरोप है कि केजरीवाल ने एक वर्ग विशेष के पीड़ितों को करोड़ों रुपये का मुआवजा दिया है। उनका सवाल है कि ऐसे में केेजरीवाल अपने निवास से महज 15 मिनट की दूरी पर आदर्शनगर के राहुल राजपूत के घर क्यों नहीं पहुंच पाते? उन्हें इसका जवाब देना चाहिए।
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हालांकि, आदर्शनगर के राहुल के घर पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहुंचे। सिसोदिया ने परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी पहुंचाई। आम आदमी पार्टी ने इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने का भी विरोध किया था।

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परिवार के लिए ऐसे जुटाए आठ लाख : 

भाजपा नेता बग्गा और कपिल मिश्रा ने फंड रेजिंग के जरिए आदर्शनगर में मारे गए राहुल के परिवार की मदद के लिए 10 लाख रुपये जमा करने का लक्ष्य रखा है। अब तक लगभग आठ लाख रुपये इकट्ठे किए जा चुके हैं। इसके पहले कपिल मिश्रा ने राजस्थान के एक पुजारी की हत्या पर इसी प्रकार की सहायता पहुंचाई थी।

क्या भाजपा नेता भी एक वर्ग विशेष के परिवार वालों को ही मदद पहुंचा रहे हैं, इस सवाल पर बग्गा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान प्रख्यात शायर राहत इंदौरी ने अपने एक करीबी की मदद के लिए अपील की थी। उन्होंने अपने मित्रों के जरिए उनके करीबी को तत्काल राहत पहुंचाई, जिसकी इंदौरी ने प्रशंसा की थी। जबकि वे भाजपा के विरुद्ध अपनी सख्त टिप्पणियों के लिए जाने जाते थे। बग्गा ने कहा कि उनके पास ऐसे हजारों उदाहरण हैं, जहां उन्होंने दूसरे जाति-धर्म के लोगों को मदद पहुंचाने का काम किया है।

यह सिलसिला लंबे समय से जारी : 
भाजपा नेता सुदेश वर्मा कहते हैं कि कांग्रेस सरकारों ने अपने समय में एक वर्ग विशेष के लिए काफी काम किया था। कांग्रेस सरकारें इसे गरीबों के हित का नाम देती थीं, जबकि यह स्पष्ट था कि वे एक वर्ग विशेष के लिए काम करती थीं। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने से पहले जिन दलों ने राज किया, वे एक जाति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए जाने जाते रहे हैं, ऐसे में उनके पास वर्तमान सरकार के ऊपर आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है।

केंद्र की योजनाओं का लाभ सभी तक पहुंचा : 
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ हर समाज, हर वर्ग और हर जाति-धर्म के लोगों को मिला है और इसको प्रमाणित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उज्जवला गैस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना और आयुष्मान योजना का लाभ सभी धर्मों-जातियों के लोगों को मिला है। वर्मा के मुताबिक, इसलिए वर्तमान केंद्र सरकार पर कोई यह आरोप नहीं लगा सकता कि सरकार ने एक वर्ग विशेष के लिए काम किया है। 
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