दिल्ली हिंसा की सुनवाई करने वाले हाईकोर्ट के जस्टिस एस मुरलीधर के रातोंरात तबादले का मामला शांत होता नहीं दिख रहा है। राजनीतिक दलों के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने कहा कि सरकार को जस्टिस मुरलीधर को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में तबादला करने का ‘आधी रात’ को आदेश जारी करते हुए ‘थोड़ी सावधानी’ बरतनी चाहिए थी।
पूर्व सीजेआई ने कहा, ‘यह महज संयोग है कि अंतिम तबादले की अधिसूचना उस दिन जारी की गई, जब उन्होंने भड़काऊ भाषणों पर आदेश दिया था। मुझे नहीं मालूम कि कौन सी तारीख को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सामने तबादले का मुद्दा आया।
हालांकि, जस्टिस मुरलीधर के तबादले का दिल्ली हिंसा मामले पर सुनवाई करते हुए उनकी टिप्पणियों से कुछ लेना देना नहीं है।’ साथ ही उन्होंने कहा कि जब देश में हालात इतने खराब और मीडिया व अन्य लोग सक्रिय हैं तो सरकार को आधी रात को ऐसे तबादले के आदेश जारी करते हुए थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए थी।
क्योंकि इसका लोगों की ओर से कुछ और मतलब निकाले जाने की संभावना है। लोग इसे अलग तरीके से समझ सकते हैं।