संसद के मानसून सत्र के संबंध में विपक्ष के हंगामे पर सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है। संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा मीडिया और सोशल मीडिया में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। दरअसल कोरोना महामारी के कारण असाधारण परिस्थिति में आयोजित होने वाले संसद सत्र में प्रश्नकाल, गैरसरकारी विधेयक और शनिवार व रविवार को सत्र चलने के तीन मुद्दों पर यह पूरा विवाद है।
इस बारे में सरकार की ओर से कहा गया है कि लोकसभा में उपनेता, रक्षामंत्री और संसदीय कार्य मंत्री ने सभी दलों के नेताओं से फोन पर चर्चा की थी। सभी दलों ने इस पर सहमति जताई। केवल टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि प्रश्नकाल होना चाहिए।
लेकिन अधिसूचना जारी होने के बाद अब कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा कहना है कि सरकार प्रश्नकाल व शून्यकाल नहीं करा कर बोलने का अधिकार छीन रही है, यह तथ्य से परे है। प्रश्नकाल नहीं कराने का निर्णय किया गया है, लेकिन अतारांकित प्रश्न के लिए दोनो पीठासीन अधिकारियों से मंत्रणा की गई है। यदि शून्यकाल भी ज्यादा देर तक चलाना चाहते हैं तो सरकार को आपत्ति नहीं है। सरकार ने विपक्ष से सहयोग की अपील की है।