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लॉकडाउन 2.0 में 'नौकरशाह और बाबुओं' का सीटिंग प्लान तैयार, इस तरह होगी सोशल डिस्टेंसिंग

Fri, 17 Apr 2020 08:45 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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South Block - फोटो : Social Media (सांकेतिक)
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केंद्र सरकार ने लॉकडाउन 2.0 में नौकरशाहों और बाबुओं कार्यालय आने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने का दिशा-निर्देश दिया है। इसको लेकर मंत्रालयों, विभागों में नया सीटिंग प्लान तैयार किया गया है। इसे 20 अप्रैल से अमली जामा पहनाने की उम्मीद है।

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निर्देश में साफ कहा गया है कि कोविड-19 का संक्रमण फैलने की प्राथमिकता को देखते हुए केवल अनिवार्य लोग ही दफ्तर आएं। लोगों की संख्या कम होने पर सोशल डिस्टेंसिंग का आसानी से पालन संभव हो सकेगा।

इसके चलते साझा रूम का इस्तेमाल करने वाले कई अधिकारियों को अलग-अलग केबिन मिल गई है। हर रूम में सैनिटाइजर की मौजूदगी अनिवार्य बनाई गई है और विजिटर की एंट्री पर अभी पूरी तरह से प्रतिबंध लागू है।

संयुक्त सचिव, निदेशक, उपसचिव

संयुक्त सचिव, निदेशक, उपसचिव स्तर के अधिकारी के पास अलग विभागीय स्टाफ और रूम होता है। संयुक्त सचिव के स्टाफ में कई सदस्य होते हैं। कई संयुक्त सचिवों के स्टाफ के सदस्य एक ही कमरे में बैठते हैं।

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इन अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर केवल आवश्यक लोगों को ही बुलाएं। ताकि कार्यालय को सैनिटाइज करने, सुरक्षा मानकों का ध्यान रखने में त्रुटि कम से कम होने तथा कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

सैनिटाइजेशन, मास्क और साफ सफाई को लेकर भी विशेष सलाह दी गई है। वॉश रूम आदि में हैंडवाश को लेकर भी अफसरों ने विशेष हिदायत दी है।

अपनी गाड़ी का करें इस्तेमाल

सभी गैर-राजपत्रित अधिकारी और कर्मचारियों से सरकार ने अपेक्षा की है कि वे अपनी गाड़ी से आएं या फिर डीटीसी की बसों का इस्तेमाल करें। डीटीसी की बसें हर रोज सैनिटाइज की जाती हैं।

वहीं मंत्रालय के भवनों में सुरक्षा का जिम्मा सीआईएसएफ के पास रहता है। दिल्ली के सीजीओ कांप्लेक्स में अर्धसैनिक बलों के भी दफ्तर हैं। इसके लिए अर्धसैनिक बलों ने भी विशेष प्लान तैयार किया है। अर्धसैनिक बल अपने जवानों को ड्यूटी स्थल तक लाने के लिए अपनी बसों का इस्तेमाल करते हैं।

इसके बाबत सुरक्षा अधिकारी की देखरेख में बसों में सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखकर सिटिंग प्लान तैयार हुआ है। पहले की तुलना में एक तिहाई सीटें ही प्रयोग में आएंगी, शेष खाली रहेंगी। सुरक्षाबलों के जोन, सेक्टर, रेंज, ग्रुप सेंटर और ट्रेनिंग सेंटर में कितने लोगों को कैसे ड्यूटी पर बुलाना है, यह जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष को सौंपी गई है।

वह सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरे मानकों का पालन करते हुए यह तय करेगा कि कितने स्टाफ को और किस रोटेशन से बुलाया जाए।उनके बैठने का प्रबंध कैसे होगा, ये सब कार्य विभागाध्यक्ष को ही पूरे करने होंगे।

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