संयुक्त सचिव, निदेशक, उपसचिव स्तर के अधिकारी के पास अलग विभागीय स्टाफ और रूम होता है। संयुक्त सचिव के स्टाफ में कई सदस्य होते हैं। कई संयुक्त सचिवों के स्टाफ के सदस्य एक ही कमरे में बैठते हैं।
सभी गैर-राजपत्रित अधिकारी और कर्मचारियों से सरकार ने अपेक्षा की है कि वे अपनी गाड़ी से आएं या फिर डीटीसी की बसों का इस्तेमाल करें। डीटीसी की बसें हर रोज सैनिटाइज की जाती हैं।
वहीं मंत्रालय के भवनों में सुरक्षा का जिम्मा सीआईएसएफ के पास रहता है। दिल्ली के सीजीओ कांप्लेक्स में अर्धसैनिक बलों के भी दफ्तर हैं। इसके लिए अर्धसैनिक बलों ने भी विशेष प्लान तैयार किया है। अर्धसैनिक बल अपने जवानों को ड्यूटी स्थल तक लाने के लिए अपनी बसों का इस्तेमाल करते हैं।
इसके बाबत सुरक्षा अधिकारी की देखरेख में बसों में सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखकर सिटिंग प्लान तैयार हुआ है। पहले की तुलना में एक तिहाई सीटें ही प्रयोग में आएंगी, शेष खाली रहेंगी। सुरक्षाबलों के जोन, सेक्टर, रेंज, ग्रुप सेंटर और ट्रेनिंग सेंटर में कितने लोगों को कैसे ड्यूटी पर बुलाना है, यह जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष को सौंपी गई है।
वह सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरे मानकों का पालन करते हुए यह तय करेगा कि कितने स्टाफ को और किस रोटेशन से बुलाया जाए।उनके बैठने का प्रबंध कैसे होगा, ये सब कार्य विभागाध्यक्ष को ही पूरे करने होंगे।