रक्षा मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी में कहा गया कि थल सेना के लिए खरीदे जा रहे परिष्कृत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम्स को रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण भारतीय इंडस्ट्री में ही स्थानीय स्तर पर किया गया है।
ये सिस्टम सेना को रेगिस्तानी व मैदानी इलाके में तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा डीएसी ने डीआरडीओ की तरफ से स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई ट्रॉल असेंबली के प्रोटोटाइप के परीक्षण को भी मंजूरी दी है। यह असेंबली रूस निर्मित टी-72 व टी-90 टैंकों को दुश्मन के क्षेत्र में लैंडमाइंस के विस्फोट से बचाने का काम करेगी।