ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता में हुई बैठक में बुधवार को राज्य की पांच बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन पर करीब 1.46 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनसे राज्य में 26 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मंगलवार आयोजित उच्च स्तरीय मंजूरी प्राधिकरण की 26 वीं बैठक में परियोजनाओं को मंजूरी का निर्णय किया गया।
ओडिशा देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनकर उभर रहा है। मंगलवार को हुई प्राधिकरण की बैठक में जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, उनसे 26,959 लोगों को रोजगार मिलेगा। वित्त वर्ष 2020-21 में ओडिशा में 2.96 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। कोरोना महामारी के बावजूद राज्य में इतनी बड़ी मात्रा में निवेश होना राज्य में निवेश क्षमताओं को दर्शाता है। मंगलवार को जिन पांच बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, उनमें कुल 1,46,172 करोड़ रुपये का निवेश होगा। ये परियोजनाएं मेटल क्षेत्र से जुड़ी हैं।
इन परियोजनाओं को दी गई सैद्धांतिक मंजूरी
भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड: कंपनी के एकीकृत इस्पात संयंत्र का पांच एमएमटीपीए से 15 एमएमटीपीए तक विस्तार होगा। 55,000 करोड़ रुपये का निवेश रेंगाली, जिला-संबलपुर में किया जाएगा। 10,000 से ज्यादा को मिलेगा रोजगार।
टाटा स्टील लि.: कंपनी जाजपुर के कलिंग नगर में कच्चे इस्पात के उत्पादन की परियोजना लगाएगी। इस पर 47 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश होगा। 4625 लोगों को रोजगार मिलेगा।
जिंदल स्टील एंड पावर लि. : कंपनी के 6 एमटीपीए के मौजूदा एकीकृत इस्पात संयंत्र की क्षमता बढ़ाकर 18.6 से 25.2 एमटीपीए तक करने का प्रस्ताव है। इस पर 24,652 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही जेएसपीएल की आंगुल इकाई में कुल निवेश एक लाख करोड़ से ज्यादा हो जाएगा। यह किसी एक स्थान पर लगा विश्व का सबसे बड़ा स्टील प्लांट होगा।
रुंगटा माइंस लि: कंपनी ढेंकनाल जिले के झारबंध में स्थित अपने एकीकृत इस्पात संयंत्र की क्षमता 2.85 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 7.55 एमएमटीपीए करेगी। इस पर 11 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश होगा। इससे 6200 लोगों को रोजगार मिलेगा।
रुंगटा माइंस लि.: कंपनी की एक अन्य परियोजना जो कि काराखंडेरा में है, उसकी क्षमता 0.53 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 3 एमएमटीपीए की जाएगी। इस पर 7920 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे 5134 लोगों को रोजगार मिलेगा।