केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कोलेजियम ने हाई कोर्ट के जजों के लिए जिन 77 नामों की सिफारिश की है, उनमें से उसने 34 को हरी झंडी दे दी है। सरकार ने चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर की अगुआई वाली बेंच को यह जानकारी भी दी है कि जजों की नियुक्ति की सिफारिशों से संबंधित कोई फाइल अब इसके पास लंबित नहीं है।
बेंच के सामने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि कोलेजियम की ओर से देश के हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति के लिए जिन 77 नामों की सिफारिश की गई थी, उनमें से 34 को इसने हरी झंडी दे दी है। बाकी 43 नामों को वापस कोलेजियम के पास पुनर्विचार के लिए भेज दिया गया है। रोहतगी ने ठाकुर की अगुआई वाली जिस बेंच को यह जानकारी दी, उसमें जस्टिस शिव कीर्ति सिंह और जस्टिस एल नागेश्वर राव भी शामिल हैं। रोहतगी ने बेंच से कहा कि केंद्र ने मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर (एमओपी) का नया मसौदा कोलेजियम के पास पुनर्विचार के लिए भेजा है। लेकिन अब तक उधर से कोई जवाब नहीं मिला है।
इस पर बेंच ने कहा कि वह 15 नवंबर को कोलेजियम की एक बैठक बुलाएगी। जिसमें चीफ जस्टिस के अलावा चार सीनियर जज शामिल रहेंगे। बेंच ने इस संबंध में 1971 के युद्ध में भाग ले चुके लेफ्टिनेंट अनिल काबोत्रा की याचिका की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति में देरी पर सरकार की खिंचाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोलेजियम की सिफारिशों के बावजूद जजों की नियुक्ति में देरी हो रही है। इस देरी की वजह से पूरे सिस्टम को ठप पड़ने की इजाजत नहीं दी सकती।