एसोसिएशन के महासचिव नेपाल सिंह सैनी और वीरेंद्र कुमार का कहना है कि सोलर क्षेत्र में देश का यह सबसे अहम संस्थान है।इसमें सोलर सैल, सोलर मॉडयूल व सोलर पावर प्लांट आदि का निर्माण होता है।जब देश के दूरदराज के इलाकों में कोई भी प्राइवेट संस्था जाने के लिए तैयार नहीं थी, तब इसी संस्थान ने वहाँ जाकर उन इलाकों को प्रकाशमय किया।
इस संस्थान ने रेलवे सेफ्टी के उपकरण स्वदेशी तकनीक के द्वारा पर तैयार किए हैं। इसके अलावा इस संस्थान ने रक्षा क्षेत्र में रडार में लगने वाले कुछ सीक्रेट उपकरण स्वत: रिसर्च कर तैयार किए हैं। लगभग 15 वर्षों से इस संस्थान ने रक्षा क्षेत्र में काम कर रही कम्पनी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की मांग की लगातार आपूर्ति की है।इससे सरकार के करोड़ों रुपये बचे हैं। साथ ही सीईएल उन उत्पादों पर भी कार्य कर रही है जो आज सेना द्वारा आयात किए जाते हैं।
संस्थान का 100 करोड़ से ज्यादा रुपया बाजार में पड़ा है। फ़िलहाल 1000 करोड़ रुपए के ऑर्डर कंपनी के पास हैं।इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकार इस संस्थान को प्राइवेट हाथों में देना चाहती है और वह भी ओने पौने दामों में।