ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार का एयर इंडिया का विनिवेश करने का विचार खटाई में पड़ सकता है क्योंकि अभी तक किसी ने उसके लिए बोली नहीं लगाई है। सरकार को बुधवार शाम तक एयर इंडिया की नीलामी के लिए कोई बोली नहीं मिली थी। लोगों को गुरुवार शाम पांच बजे तक अपना रुचि पत्र (ईओएल) जमा करवाने की समयसीमा दी गई है। विमानन सचिव आरएन चौबे ने कहा कि ईओएल को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। असल डेडलाइन 14 मई थी जिसे बाद में बढ़ाकर महीने के आखिर तक कर दिया गया था।
चौबे ने कहा, 'जैसा कि आमतौर पर होता है हम आखिरी समय तक बोली लगाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। टाइमलाइन को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। एयर इंडिया की नीलामी को लेकर आगे के निर्णय वैकल्पिक तंत्र द्वारा लिया जाएगा।' वैकल्पिक तंत्र मंत्रियों का एक समूह है जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री करते हैं। केंद्र सरकार घाटे में चल रही एयरलाइंस की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है।
एयर इंडिया पर इस समय 33,392 करोड़ रुपए का कर्ज है। सरकार एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर इंडिया एयरपोर्ट सर्विस कंपनी (एसएटीएस) को बेचना चाहती है।
जून 2017 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीईए) से इसके विनिवेश की मंजूरी मिली थी। चौबे ने इससे पहले यह साफ कर दिया था कि सरकार तब तक एयर इंडिया को नहीं बेचेगी जब तक उसे सही कीमत नहीं मिल जाती है। उन्होंने कहा, 'यदि बोली का मूल्य अपर्याप्त होता है तो सरकार के पास यह अधिकार है कि वह एयर इंडिया को बेचे या ना बेचे।' सरकार ने पिछले साल एयरलाइंस को बेचने का निर्णय लिया था।
इंडिगो अकेली ऐसी कंपनी थी जिसने औपचारिक तौर पर एयर इंडिया को खरीदने में अपनी इच्छा व्यक्त की थी।