भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए केंद्र सरकार ने 21 ‘भ्रष्ट’ आयकर अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त कर दिया। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों में पांचवें चरण की कार्रवाई करते हुए इन अधिकारियों की छुट्टी की है। सरकार ने इससे पहले भी भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन रिटायर किया है।
इस बार रिटायर किए गए सबसे ज्यादा छह अधिकारी महाराष्ट्र के हैं। इनमें मुंबई में पदस्थापित प्रीता बाबूकुट्टन, विजय कुमार कोहड़, टीवी मोहन, ठाणे में पदस्थापित अनिल मलेल और माधवी चव्हाण के अलावा नागपुर में तैनात एमडी जगदाले शामिल हैं। इसके बाद आंध्र प्रदेश और राजस्थान के चार-चार अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इस सूची में झारखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश में पदस्थापित दो-दो अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें से कुछ अधिकारियों को तो सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में कहा था कि कर विभाग में कुछ ऐसे लोग हैं, जो अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर ईमानदार करदाताओं को परेशान कर रहे हैं। इसके अलावा प्रक्रियागत मामूली गलती के लिए भी कठोर कार्रवाई कर रहे हैं। मोदी ने कहा था कि हम इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे और भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन रिटायर करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।