चुनावी साल में लुभावनी योजनाएं चलाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रिजर्व फंड पर नजर गड़ाने के आरोपों का केंद्र सरकार ने शनिवार को करारा जवाब दिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकार को अगले छह महीने तक आरबीआई या किसी अन्य संस्थान से किसी भी तरह का अतिरिक्त फंड लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके बिना भी सरकार अपने राजकोषीय घाटे के तय लक्ष्य को हासिल कर सकती है।
जेटली ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, हमें किसी अन्य संस्थान से हमारे राजकोषीय घाटे के लिए वित्तीय मदद के तौर पर अतिरिक्त फंड की आवश्यकता नहीं है। स्पष्ट तौर पर यह सरकार की मंशा नहीं है। आरबीआई को अपने दायरे में लाने के प्रयास वाले आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार संस्थान की स्वायत्तता का सम्मान करती है। उन्होंने कहा, हम स्वायत्तता का सम्मान करते हैं, लेकिन यदि उसी समय कुछ खास क्षेत्र नकदी संकट से गुजर रहे हैं तो आरबीआई के पास कुछ तय अधिकार होने के बावजूद हमें अर्थव्यवस्था के व्यापक हित में उन मुद्दों को अहम तरीके से उठाना ही होगा।