यदि उत्तराखंड और दिल्ली/एनसीआर में 8+ तीव्रता का भूकंप आता है, तो उससे जान-माल की क्षति के संदर्भ में उसके प्रभाव का अध्ययन किया गया है, अगर हां तो ऐसे अध्ययन या रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराएं। एनडीएमए ने जवाब दिया कि उत्तराखंड या दिल्ली/एनसीआर क्षेत्र में 8.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप के संभावित प्रभाव का आकलन करने के लिए कोई समर्पित अध्ययन नहीं किया गया है। विनाशकारी भूकंप की संभावना और उससे बचने के उपाय, इस बाबत सरकार की क्या तैयारी है, अधिवक्ता तमाल सान्याल ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से एक आरटीआई के माध्यम से यह बात पूछी थी। उन्होंने एनडीएमए से कई दूसरे सवाल भी किए हैं, जिनका जवाब प्राधिकरण द्वारा दिया गया है।
विनाशकारी भूकंप की चेतावनी …
अधिवक्ता तमाल सान्याल के मुताबिक, उत्तराखंड एवं दिल्ली एनसीआर सहित कई इलाकों में विनाशकारी भूकंप संभावित है। यह बात विशेषज्ञ भी कह चुके हैं। उन्होंने बाकायदा एनडीएमए को, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को लेकर मीडिया में छपी खबरों का हवाला भी दिया था। बतौर सान्याल, वैज्ञानिक और कई प्रोफेसर उत्तराखंड एवं दिल्ली एनसीआर सहित देश के दूसरे क्षेत्रों में विनाशकारी भूकंप की चेतावनी दे चुके हैं। लोगों को यह मालूम होना चाहिए कि क्या सरकार ने 8.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप के संभावित प्रभाव का आकलन किया है या नहीं। अगर ऐसी प्राकृतिक आपदा आती है तो उस स्थिति में लोगों का बचाव कैसे होगा। भूकंप से पहले लोगों को बचाने के लिए क्या किया गया है। क्या भवनों के डिजाइन में कोई बदलाव हुआ है। क्या मौजूदा इमारतों को भूकंप से सुरक्षित किया गया है, आदि चिंताओं को लेकर सान्याल ने कई सवाल पूछे थे।
यूरेशियन प्लेटों के बीच विवर्तनिक अभिसरण …
अधिवक्ता सान्याल ने पूछा था कि भूकंप की चेतावनी देने वाले समाचारों की सत्यता और प्रामाणिकता (क्या रिपोर्ट सही हैं) ठीक है। अपने सम्मानित संगठन द्वारा किए गए/प्रकाशित संबंधित शोध/रिपोर्ट की प्रतियां, यदि कोई हों तो उपलब्ध कराएं। एनडीएमए ने इसके जवाब में कहा, मांगी गई जानकारी आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2 (एफ) के दायरे में नहीं आती है। हालांकि, यह सर्वविदित है कि भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच चल रहे विवर्तनिक अभिसरण के कारण हिमालय भूकंप की घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) और उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में अतीत में आए कई बड़े भूकंपों ने इस वैज्ञानिक सहमति को पुष्ट किया है कि इन क्षेत्रों में भविष्य में बड़े या भीषण भूकंपों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। भूकंपीय अनुसंधान में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद, वर्तमान में भविष्य में आने वाले भूकंपों के सटीक समय, स्थान या तीव्रता का अनुमान लगाने के लिए कोई विश्वसनीय तकनीक उपलब्ध नहीं है।
भूकंप सुरक्षा संबंधी जानकारी …
यह अनिश्चितता सक्रिय जोखिम न्यूनीकरण और तैयारी उपायों के महत्व को रेखांकित करती है। आईएचआर की भूकंपीय संवेदनशीलता को समझते हुए, एनडीएमए ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इस दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इनमें भूकंप जोखिम प्रबंधन और शमन पर व्यापक दिशानिर्देश तैयार करना, क्षेत्र-विशिष्ट शमन परियोजनाओं का कार्यान्वयन और नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करना शामिल है। एनडीएमए, सामुदायिक तैयारी को बढ़ाने और राज्यों को उचित शमन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से सोशल मीडिया और जन-सम्पर्क के माध्यम से भूकंप सुरक्षा संबंधी जानकारी के व्यापक प्रसार पर भी जोर देता है।
50 शहरों के लिए भूकंप जोखिम मूल्यांकन …
आरटीआई में पूछा गया कि क्या सरकार द्वारा इस पर कोई जोखिम मूल्यांकन अध्ययन किया गया है। यदि हां, तो कृपया उसकी प्रति प्रदान करें। एनडीएमए ने बताया, भूकंपीय क्षेत्र 4 और 5 में स्थित 50 प्रमुख शहरों के लिए भूकंप जोखिम मूल्यांकन अध्ययन किए गए हैं। इनमें से कई भारतीय हिमालयी क्षेत्र (सीएचआर) और उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) में आते हैं। इस मूल्यांकन की व्यापक रिपोर्ट एनडीएमए की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, एनडीएमए ने दो और केंद्रित परियोजनाएं शुरू की हैं, एक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चुनिंदा शहरों के भूकंपीय जोखिम मूल्यांकन के लिए समर्पित है। दूसरी परियोजना भूकंपीय क्षेत्र 5 में स्थित 16 शहरों को कवर करती है, ताकि उनकी भूकंप भेद्यता का आकलन और समाधान किया जा सके। इन पहलों का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में जोखिम-सूचित योजना और तैयारी और शमन उपायों को मजबूत करना है।
कोई समर्पित अध्ययन नहीं हुआ है…
आरटीआई में पूछा गया, यदि उत्तराखंड और दिल्ली/एनसीआर में 8+ तीव्रता का भूकंप आता है, तो उससे जान-माल की क्षति के संदर्भ में उसके प्रभाव का पता लगाने के लिए क्या कोई अध्ययन किया गया है। एनडीएमए ने बताया, उत्तराखंड या दिल्ली/एनसीआर क्षेत्र में 8.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप के संभावित प्रभाव का आकलन करने के लिए कोई समर्पित अध्ययन नहीं किया गया है। उत्तराखंड और दिल्ली/एनसीआर क्षेत्र में इस तरह के भूकंप से होने वाले नुकसान/क्षति का अनुमान बाबत भी सवाल किया गया था। इसके अलावा यह भी पूछा गया था कि क्या उत्तराखंड और दिल्ली/एनसीआर में ऐसे भूकंप से होने वाले संभावित नुकसान, तबाही के प्रबंधन और न्यूनीकरण के लिए विस्तृत उपाय व कदम उठाए गए हैं।
एनडीएमए ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, राज्य सरकारों और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय में, देश भर में संभावित भूकंपों के प्रभाव के प्रबंधन और न्यूनीकरण के लिए कई उपाय लागू किए गए हैं। जैसे,
1. एनडीएमए, भूकंप परिदृश्यों के लिए उनकी तैयारियों एवं प्रतिक्रिया क्षमताओं का मूल्यांकन और संवर्धन करने के लिए दिल्ली-एनसीआर व उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों में नियमित रूप से बड़े मॉक अभ्यास और टेबलटॉप सिमुलेशन आयोजित करता है।
2. एनडीएमए ने भूकंप जोखिम प्रबंधन पर दिशानिर्देश विकसित किए हैं, जिनमें भूकंपीय रूप से सुरक्षित भवनों के निर्माण, भूकंप की तैयारी और प्रतिक्रिया, भूकंपीय भेद्यता एवं जोखिम मूल्यांकन पद्धतियों आदि पर ध्यान केंद्रित करने वाले दिशानिर्देश शामिल हैं।
3. तैयारी, न्यूनीकरण और प्रतिक्रिया कार्यों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए, एनडीएमए राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाता है। इसके तहत समर्पित कार्यक्रम, 'आपदा का सामना', दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता है। इसमें विषय-विशेषज्ञ, आम जनता के साथ व्यावहारिक भूकंप सुरक्षा सलाह साझा करते हैं।
4. 17 फरवरी, 2025 को दिल्ली में आए 4.0 तीव्रता के भूकंप के बाद, एनडीएमए ने दिल्ली की भूकंप संबंधी तैयारियों के स्तर का आकलन करने के लिए प्रमुख स्थानीय सरकारी विभागों के साथ एक संगोष्ठी आयोजित की। चर्चाओं के आधार पर, तत्काल न्यूनीकरण कार्यों की एक श्रृंखला की सिफारिश की गई और हितधारकों के बीच प्रसारित की गई।
5. दिल्ली में, एनडीएमए ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग नागरिकों सहित स्थानीय समुदायों को बुनियादी भूकंप सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करने के लिए 300 से अधिक नुक्कड़ नाटक (नुक्कड़ नाटक) आयोजित किए हैं। इन जमीनी स्तर की पहलों का उद्देश्य समुदाय-आधारित आपदा तैयारियों को मजबूत करना है।
6. एनडीएमए, वर्तमान में सीबीआरआई, रुड़की द्वारा संचालित "भारतीय हिमालयी क्षेत्र: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के शहरों का जोखिम मूल्यांकन" नामक एक परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है। यह परियोजना भारतीय हिमालयी क्षेत्र में भूकंपीय जोखिम के आकलन पर केंद्रित है, और अंतिम रिपोर्टें वर्तमान में समीक्षाधीन हैं। कुछ अन्य पहल भी प्रक्रिया में हैं।