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#MeToo: एक अकबर पर कई अकबर का खतरा नहीं मोल लेना चाहती सरकार

Fri, 12 Oct 2018 08:14 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर के ऊपर लगे आरोपों को लेकर गंभीर है। एक केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि मामला गंभीर है और प्रधानमंत्री की जानकारी में है। कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने खुलकर इस पर अपना बयान दे दिया है। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने अकबर पर लगे आरोपों की जांच के लिए चार रिटायर जजों की समिति बना दी है। वहीं अकबर को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाए जाने पर सूत्र का कहना है कि एक अकबर के बाद कई अकबर का सरकार खतरा नहीं मोल लेना चाहती।

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केन्द्र सरकार में राज्यमंत्री स्तर के सूत्र का कहना है कि एमजे अकबर पर मी टू अभियान के लग रहे आरोप को लेकर सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है। हालांकि विदेश मंत्रालय इस मामले में पूरी तरह से शांत है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी इस मामले में पूरी तरह से चुप्पी साध रखा है। मी टू अभियान पर पहला कदम महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने ही उठाया है। हालांकि इस प्रकरण में एमजे अकबर का नाम लिए बिना रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और हर सिमरत कौर बादल ने मी टू अभियान के तहत आने वाले महिलाओं के साहस की सराहना की है। 

इस बारे में भाजपा के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ चुके अजय अग्रवाल का कहना है कि मामला गंभीर है। एक नहीं कई महिलाओं ने एमजे अकबर पर उत्पीडऩ का आरोप लगाया है। इस पर खुद एमजे अकबर को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अग्रवाल का कहना है कि आरोप लगा है तो इसकी जांच भी होनी चाहिए। यदि किसी ने गलत आरोप लगाए हैं तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।   
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भाजपा के प्रवक्ता भी अभी इस मामले में कुछ नहीं बोल रहे हैं। नलिन कोहली से लेकर अन्य का कहना है कि इस मामले में पार्टी ने अभी कुछ तय नहीं किया है। भाजपा की एक और महिला सांसद का कहना है कि अभी वह समय का इंतजार कर रही हैं। उन्हें विश्वास है कि जल्द ही इस बारे में कोई निर्णय होगा। इसके बाद वह कोई जवाब देंगी।

एक के बाद कई अकबर पर लटकेगी तलवार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साढ़े चार साल की सरकार में विपक्ष ने कई आरोप लगाए, नैतिक दबाव भी बनाने की कोशिश की लेकिन सरकार ने किसी भी मामले में न तो ढंग से जांच बिठाई और न ही आरोपों पर किसी का इस्तीफा लिया। विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर का मामला सरकारी कामकाज से जुड़ा नहीं है, लेकिन उनके साथ काम कर चुकी महिलाओं ने उन पर उत्पीडऩ के आरोप लगाए हैं।  मी टू अभियान के तह महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप से सरकार नैतिक दबाव में है।

कांग्रेस पार्टी ने अभी इस मुद्दे को ज्यादा हवा नहीं दी है। वह समय का इंतजार कर रही है। समझा जा रहा है केन्द्र सरकार में इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर चर्चा तो हो रही है, लेकिन सरकार एमजे अकबर को बलि का बकरा बनाने के पक्ष में नहीं है। तमाम सूत्रों ने इसके दो कारण बताए हैं। पहला तो यह कि अकबर का इस्तीफा होने के बाद विपक्ष को राजनीतिक हमले बोलने का अवसर मिल जाएगा। दूसरे अन्य मामले में आरोपों का सहारा लेकर विपक्ष अन्य नेताओं के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई का दबाव बढ़ाएगा। इसलिए सरकार काफी संभल कर चल रही है।

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