प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने आम बजट में लगातार दूसरी बार कोरोना टीकाकरण को स्थान दिया है। हालांकि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार टीकाकरण के बजट में 70 फीसदी की कटौती की है लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस कटौती के बाद भी टीकाकरण के लिए पर्याप्त बजट है।
नाम न छापने की शर्त पर मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अगले कुछ दिन या महीने में कई वैक्सीन हमारे सामने आ सकती हैं लेकिन एक बात स्पष्ट है कि सरकार हर वैक्सीन को खरीद नहीं सकती है। न ही कभी सरकार ने प्रत्येक वैक्सीन की खरीदी को लेकर कभी कोई दावा किया है। इसी तरह एहतियाती खुराक को लेकर बात करें तो यह भी अब स्पष्ट है कि जोखिम समूह को छोड़ अन्य वर्ग के लिए वैक्सीन की इस तीसरी खुराक का फिलहाल कोई असर नहीं है।
अभी तक के साक्ष्यों के आधार पर राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह ने भी हर किसी को एहतियाती खुराक देने की सिफारिश नहीं की है। इसीलिए सरकार ने बजट में एहतियाती खुराक को लेकर विचार नहीं किया है।
जानकारी के अनुसार सरकार ने आम बजट में टीकाकरण को पांच हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है जो पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में 70 फीसदी कम है। पिछले वर्ष सरकार ने आम बजट में कोरोना टीकाकरण के लिए 35 हजार करोड़ रुपये तय किए। बाद में, संशोधित होने के बाद यह 39 हजार करोड़ तक पहुंच गया जिसमें से 20 हजार करोड़ रुपये खर्च भी हुए हैं। देश में अब तक 167 करोड़ से भी अधिक टीकाकरण पर यह बजट खर्च हुआ है।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अगले एक महीने में हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई कंपनी की कॉर्बेवैक्स भी आ सकती है जिसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। यह देश की पहली प्रोटीन सब यूनिट आधारित वैक्सीन है। इसके अलावा जायडस कैडिला कंपनी की जायकोव-डी के लिए सरकार ने एक करोड़ खुराक का ऑर्डर पहले ही दे दिया है।
उन्होंने यहां तक बताया कि कोवोवैक्स खरीद की योजना भी नहीं है। इस वैक्सीन को सीरम कंपनी तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि देश में अब तक 75 फीसदी से अधिक व्यस्क आबादी का टीकाकरण पूरा हो चुका है। 63 फीसदी किशोर पहली खुराक ले चुके हैं। इस आधार पर देखें तो आगामी दिनों में 25 से 30 करोड़ लोगों के लिए मौजूदा टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल वैक्सीन ही काफी हैं। जिन वैक्सीन को भारतीय वैज्ञानिकों के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है, केवल उन्हें कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
कम बजट से पूरा हो जाएगा टीकाकरण
अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल जब टीकाकरण शुरू हो रहा था, उस दौरान एक बड़े बजट की आवश्यकता थी। अब अधिकांश आबादी टीकाकरण पूरा कर चुकी है। ऐसे में कम बजट से भी बकाया लोगों का टीकाकरण किया जा सकता है। इसी तरह सरकार के एजेंडे में एहतियाती खुराक सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए है जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है और उन्हें पहले से कोई सहायक रोग है।
इनके अलावा फ्रंटलाइन वर्कर और स्वास्थ्य कर्मचारियों को एहतियाती खुराक दी जा रही है। इनके अलावा किसी और को जरूरत भी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘भविष्य का पता नहीं लेकिन अभी हर किसी को एहतियाती खुराक देने की कोई योजना नहीं है।’