केंद्र सरकार में श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि कैबिनेट के समक्ष भी यह मुद्दा उठा है। हालांकि यह पहल इतनी आसान नही है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय इस दिशा में कदम आगे रख चुका है।
चाहे वो कोई भी क्षेत्र हो, सरकार हर श्रमिक का डाटा तैयार करेगी। करीब 8 करोड़ ऐसे श्रमिकों की जानकारी केंद्र सरकार के पास है, जो संगठित क्षेत्र के तहत काम करते हैं। बाकी 40 करोड़ श्रमिकों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।
लॉकडाउन 1.0 के बाद जब विभिन्न राज्य सरकारों ने श्रमिकों के खाते में राशि डालने की घोषणा की तो हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए थे। कई राज्य तो ऐसे रहे, जहां लाखों की संख्या में भी पंजीकृत मजदूर नहीं मिले।
सरकार की शर्त थी कि केवल पंजीकृत श्रमिक के खाते में ही राहत राशि जाएगी। भवन निर्माण एवं कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा मजदूर काम करते हैं, लेकिन यहां गिनती के श्रमिक भी पंजीकृत नहीं हैं।
श्रमिकों के कल्याण के लिए कैबिनेट ने कई तरह के सुझाव दिए थे, जिनमें प्रवासी श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय डाटाबेस बनाने की जरूरत पर खास बल दिया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बाबत काम शुरू कर दिया है।
डाटा बेस तैयार होने के बाद हर एक श्रमिक को विशिष्ट पहचान नंबर प्रदान किया जाएगा। जब इन श्रमिकों का डाटा तैयार हो जाएगा तो उसके बाद कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा योजना का लाभ इन्हें मिल सकेगा।