सरकारी विभाग और निजी कंपनी ड्रोन का विस्तृत क्षेत्र में इस्तेमाल करना चाह रहे हैं। यही वजह है कि नागर विमानन मंत्रालय जल्द से जल्द इसका फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में जुटा है। बहुत से लोगों और संस्थाओं ने इसकी कार्यप्रणाली को लेकर सुझाव दिए हैं।
हरियाणा, उत्तरप्रदेश, पंजाब, राजस्थान और कई दूसरे सीमावर्ती राज्यों में कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उड़ाया गया। फसलों में दवा का छिड़काव, ड्रोन ने इस काम को बहुत आसान बना दिया। इन राज्यों को नागर विमानन मंत्रालय ने इजाजत दी है। इनके अलावा सरकारी क्षेत्र के हवाई प्रशिक्षण संस्थान व प्राइवेट सेंटरों को भी शर्तों के साथ ड्रोन उड़ाने की छूट दी गई।
फ्लाइंग एविएशन अकादमी- चेन्नई, एविएशन फ्लाइंग क्लब प्राइवेट लि.- अलीगढ़, एशिया पैसेफिक फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी- हैदराबाद, फाल्कन एविएशन ट्रेनिंग अकादमी हरियाणा सरकार का ट्रेनिंग ऑपरेशन, बांबे फ्लाइंग क्लब और आईओसीएल आदि को ड्रोन के इस्तेमाल की विशेष अनुमति दी गई है।
रिफाइनरी में सामाजिक व्यवस्था में होने वाली गड़बड़ी की निगरानी करने, कहीं से धुंए के रूप में कोई तकनीकी खराबी और गैस एवं कोयला उद्योग क्षेत्र में सोशल ऑडिट आदि के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। पाइपलाइन के लंबे क्षेत्र की निगरानी किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके लिए अब ड्रोन ने राह आसान बना दी है।
देश की ऊर्जा कंपनियों ने अपने कर्मियों को कोरोना वायरस से दूर रखने और कार्य संचालन को सुचारू तौर पर चलाने के लिए ड्रोन उड़ाए हैं। भारत पेट्रोलियम में श्रमिकों के व्यवहार पर नजर रखने के लिए लंबे क्षेत्र में ड्रोन ने उड़ान भरी हैं।
सामाजिक-सुरक्षा नियमों की धज्जियां न उड़ सकें, यह कदम इसलिए उठाया गया है। कंपनी ने अपने सभी संयंत्रों में ड्रोन को एक स्वच्छता निरीक्षक बनाकर तैनात करने की योजना बनाई है।